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नेपाल में जलप्रलय से हाहाकार, कैलाश मानसरोवर जा रहे करीब 400 तीर्थयात्री संपर्क से बाहर

काठमांडू। नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार सुबह आई भीषण फ्लैश फ्लड ने व्यापक तबाही मचा दी। इस आपदा का असर कैलाश मानसरोवर यात्रा पर भी पड़ा है। तिब्बत की ओर जाने की तैयारी कर रहे करीब 390 तीर्थयात्रियों से संपर्क नहीं हो सका है। इनमें 93 नेपाली नागरिक हैं, जबकि बाकी यात्रियों में बड़ी संख्या भारतीयों की बताई जा रही है।

रसुवागढ़ी में बाढ़ से तबाही

बाढ़ के तेज बहाव ने नेपाल-चीन सीमा के पास रसुवागढ़ी क्षेत्र में सड़क, पुल और अन्य जरूरी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है। इसके कारण सीमा मार्ग पर आवाजाही और संचार व्यवस्था बाधित हो गई। तीर्थयात्रियों को बुधवार को तिब्बत में प्रवेश करना था, लेकिन बाढ़ के कारण उनकी स्थिति की जानकारी जुटाना चुनौतीपूर्ण हो गया।

नेपाल पर्यटन बोर्ड की प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कुल 384 यात्री और पर्यटक लापता या संपर्क से बाहर बताए गए हैं। इनमें 291 विदेशी नागरिक और 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं। अधिकारियों और यात्रा एजेंसियों की ओर से यात्रियों से संपर्क स्थापित करने तथा उनकी स्थिति का पता लगाने के प्रयास जारी हैं।

कई देशों के यात्री प्रभावित

इस घटना में भारतीय नागरिकों के अलावा नेपाल, ब्रिटेन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों के यात्रियों के भी प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। अलग-अलग ट्रैवल एजेंसियों के समूह इस मार्ग से कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए आगे बढ़ रहे थे।

वहीं, आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने भी बताया कि उनके कैलाश यात्रा समूह के कुछ सदस्य तिब्बत के ग्यिरोंग क्षेत्र में बाढ़ की चपेट में आए। उनके अनुसार, एक इमिग्रेशन केंद्र भी बाढ़ से प्रभावित हुआ है और वहां मौजूद लोगों की स्थिति की जानकारी जुटाई जा रही है।

राहत और बचाव अभियान तेज

नेपाल में राहत एवं बचाव दल प्रभावित इलाकों में खोज अभियान चला रहे हैं। भारी मलबे और क्षतिग्रस्त संपर्क मार्गों के कारण अभियान में कठिनाइयां सामने आ रही हैं। भारत समेत विभिन्न देशों की एजेंसियां अपने नागरिकों की स्थिति की जानकारी जुटाने में जुटी हैं।

फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता संपर्क से बाहर यात्रियों का पता लगाना और उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना है।

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