देहरादून। उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू (इंफ्लुएंजा एच1एन1) के मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी और तैयारियां तेज कर दी हैं। अगस्त में अब तक प्रदेश में 31 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। इनमें अधिकतर मरीज देहरादून के बताए जा रहे हैं। बढ़ते मामलों को देखते हुए सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को अस्पतालों में व्यवस्थाएं मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग के राज्य सर्विलांस अधिकारी डॉ. पंकज के अनुसार, सरकारी और निजी अस्पतालों के साथ मेडिकल कॉलेजों में स्क्रीनिंग बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर मरीजों की आवश्यक जांच सुनिश्चित करने को कहा गया है। साथ ही स्वाइन फ्लू के उपचार के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की जा रही है।
सभी जिलों में रैपिड रिस्पॉन्स टीम सक्रिय
एकीकृत रोग निगरानी परियोजना (आईडीएसपी) के तहत सभी जिलों में रैपिड रिस्पॉन्स टीमें सक्रिय कर दी गई हैं। किसी जिले में चार से अधिक मामले सामने आने पर टीम मौके पर पहुंचकर स्क्रीनिंग करेगी। प्रत्येक टीम में चिकित्सक समेत चार स्वास्थ्यकर्मी शामिल किए गए हैं।
अस्पतालों को पर्याप्त संसाधन रखने के निर्देश
स्वास्थ्य विभाग की एडवाइजरी में अस्पतालों को इंफ्लुएंजा जांच किट, पीपीई, मास्क, वीटीएम वायल, ओसेल्टामिविर दवा और वेंटिलेटर की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है। विभाग ने व्यवस्थाओं की समीक्षा के निर्देश देते हुए लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी दी है।
सामान्य वायरल जैसे दिखते हैं लक्षण
विशेषज्ञों के अनुसार, स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल जैसे हो सकते हैं। अचानक बुखार, ठंड लगना, खांसी, नाक बहना, सांस लेने में परेशानी, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी और अत्यधिक थकान इसके प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर चिकित्सकीय सलाह और आवश्यक जांच कराने की सलाह दी गई है।
स्वास्थ्य सचिव विनय शंकर पांडेय ने कहा कि एच1एन1 से निपटने के लिए राज्य की सभी चिकित्सा इकाइयों को आवश्यक तैयारियां दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।





