नई दिल्ली। पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने कहा है कि आने वाले वर्षों में चीन भारत का मुख्य दीर्घकालिक प्रतिद्वंद्वी होगा। उन्होंने कहा कि भारत के पाकिस्तान के साथ युद्ध हुए हैं, लेकिन भविष्य की रणनीतिक और बहुआयामी प्रतिस्पर्धा में चीन की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण होगी।
जनरल नरवणे ने भारत की सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा करते हुए कहा कि चीन के साथ प्रतिस्पर्धा केवल सैन्य क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कई क्षेत्रों में देखने को मिलेगी। ऐसे में भारत को दीर्घकालिक दृष्टि से अपनी रणनीतिक तैयारियों और क्षमताओं को मजबूत करना होगा।
पाकिस्तान से अलग है चुनौती
पूर्व सेना प्रमुख के मुताबिक भारत और पाकिस्तान के बीच कई बार सैन्य संघर्ष हो चुके हैं और दोनों देशों के बीच सुरक्षा संबंधी चुनौतियां बनी हुई हैं। हालांकि, चीन की आर्थिक, सैन्य और रणनीतिक क्षमता उसे भारत के लिए अलग स्तर की चुनौती बनाती है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत को अपनी सुरक्षा नीति बनाते समय केवल तत्काल खतरों पर नहीं, बल्कि भविष्य की दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखना चाहिए।
सीमा विवाद अहम मुद्दा
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद लंबे समय से रणनीतिक चिंता का विषय रहा है। वर्ष 2020 में पूर्वी लद्दाख में दोनों देशों की सेनाओं के बीच तनाव और हिंसक झड़प के बाद संबंधों में गंभीर तनाव पैदा हुआ था। इसके बाद सीमा क्षेत्रों में सैन्य तैनाती और बुनियादी ढांचे को लेकर भी दोनों पक्षों का ध्यान बढ़ा है।
जनरल नरवणे का आकलन ऐसे समय सामने आया है जब भारत-चीन संबंधों में सीमा विवाद के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर रणनीतिक प्रतिस्पर्धा भी महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है।
उन्होंने संकेत दिया कि भारत को चीन की चुनौती का सामना करने के लिए सैन्य क्षमता के साथ आर्थिक, तकनीकी और कूटनीतिक मोर्चों पर भी अपनी ताकत बढ़ानी होगी।





