नई दिल्ली। नीट पेपर लीक और यूजीसी नेट में सामने आई गड़बड़ियों के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की विश्वसनीयता पर उठे सवालों के बीच सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। NTA के सामने अब अगले 90 दिनों में परीक्षा प्रणाली को नए सिरे से मजबूत करने और छात्रों का भरोसा बहाल करने की चुनौती है।
नई व्यवस्था में परीक्षा के प्रश्नपत्र तैयार करने और उनकी जांच की प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाने पर जोर दिया जा रहा है। प्रश्नपत्रों की जांच के लिए चार स्तर की व्यवस्था लागू करने की योजना है। इसके साथ ही परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े करीब 600 विशेषज्ञों को हटाकर नई टीम तैयार की जा रही है।
साइबर सुरक्षा पर खास फोकस
NTA की परीक्षा व्यवस्था को साइबर हमलों और डिजिटल गड़बड़ियों से बचाने के लिए साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी। एजेंसी में टेस्ट सिक्योरिटी, साइबर सुरक्षा, साइकोमेट्रिक्स और तकनीक से जुड़े विशेषज्ञों की नियुक्ति की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
इसके अलावा NTA के कार्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत की जाएगी। रिपोर्ट के मुताबिक, एजेंसी के परिसरों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की तैनाती की योजना है। परीक्षा केंद्रों और गोपनीय प्रक्रियाओं की सुरक्षा को भी नए सिरे से परखा जाएगा।
UGC-NET की गड़बड़ियों ने बढ़ाया दबाव
हाल में UGC-NET जून 2026 के अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र के प्रश्नपत्रों में तथ्यात्मक, भाषाई और अनुवाद संबंधी खामियां सामने आई थीं। इसके बाद NTA ने इन तीन विषयों की दोबारा परीक्षा कराने का फैसला किया है। परीक्षा 9 और 10 सितंबर को होगी।
लगातार सामने आई इन घटनाओं के बाद NTA के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ परीक्षा को सुरक्षित बनाना नहीं, बल्कि छात्रों और अभिभावकों का भरोसा वापस हासिल करना है। सरकार की नई कवायद इसी दिशा में परीक्षा तंत्र को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने पर केंद्रित है।





