नई दिल्ली। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के सदस्य संजीव सान्याल ने देश के मौजूदा कोचिंग सिस्टम पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे ‘माफिया’ करार दिया है। उन्होंने कहा कि भारत में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाली कोचिंग व्यवस्था ने शिक्षा के मूल उद्देश्य को प्रभावित किया है और इसमें व्यापक सुधार की जरूरत है।
सान्याल ने कहा कि देश में एक ऐसा कोचिंग तंत्र विकसित हो गया है, जहां बड़ी संख्या में छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निजी संस्थानों पर निर्भर हैं। इससे शिक्षा का स्वरूप परीक्षा-केंद्रित होता जा रहा है। उन्होंने इस पूरे सिस्टम की गहन समीक्षा और नियमन की जरूरत पर जोर दिया।
सान्याल ने भारत के कोचिंग तंत्र की तुलना चीन से करते हुए वहां की शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मॉडल का भी उल्लेख किया। उन्होंने संकेत दिया कि भारत को दूसरे देशों के अनुभवों से सीखते हुए अपनी परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था में जरूरी बदलाव करने चाहिए।
उनकी टिप्पणी ऐसे समय आई है जब देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर बहस तेज है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर उठे सवालों के बीच परीक्षा व्यवस्था में सुधार की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। NTA ने परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए विशेषज्ञों में बदलाव, प्रश्नपत्रों की जांच के लिए चार स्तरीय व्यवस्था और सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने जैसे कदम उठाए हैं।
हाल के वर्षों में पेपर लीक, परीक्षा में अनियमितताओं और परिणामों में देरी जैसे मुद्दों ने छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ाई है। ऐसे माहौल में कोचिंग संस्थानों पर छात्रों की बढ़ती निर्भरता भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
सान्याल की टिप्पणी ने शिक्षा व्यवस्था में संरचनात्मक सुधार की बहस को एक बार फिर सामने ला दिया है। उनका जोर ऐसे मॉडल पर है जिसमें छात्रों को केवल प्रतियोगी परीक्षा पास करने के लिए तैयार करने के बजाय बेहतर शिक्षा और व्यापक कौशल हासिल करने के अवसर मिलें।





