नई दिल्ली। देश की राजनीति में आपराधिक मामलों को लेकर गंभीर तस्वीर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा 326 सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें लोकसभा के 251 और राज्यसभा के 75 सदस्य शामिल हैं। इसके अलावा 14 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की घोषणा की है।
रिपोर्ट वरिष्ठ अधिवक्ता और सुप्रीम कोर्ट के अमिकस क्यूरी विजय हंसरिया ने दाखिल की है। इसमें बताया गया है कि मौजूदा और पूर्व सांसदों-विधायकों के खिलाफ कुल 4,192 आपराधिक मामले लंबित हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में 1,243 मामलों का निपटारा हुआ, जबकि इसी अवधि में 1,050 नए मामले दर्ज हुए। इससे लंबित मामलों की संख्या में अपेक्षित कमी नहीं आ सकी है।
लोकसभा में 251 सांसदों पर मामले
रिपोर्ट के अनुसार, लोकसभा के 543 सदस्यों में से 251 सांसदों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की जानकारी दी है। इनमें 170 मामले गंभीर श्रेणी के हैं, जिनमें पांच वर्ष या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है। वहीं, राज्यसभा के 233 सदस्यों में से 75 के खिलाफ आपराधिक मामले हैं। इनमें 40 मामले गंभीर प्रकृति के बताए गए हैं।
केरल के सांसदों का आंकड़ा सबसे ज्यादा
राज्यवार आंकड़ों में केरल सबसे ऊपर है। वहां 20 में से 19 सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। तेलंगाना में 17 में से 14 सांसदों ने आपराधिक मामलों की घोषणा की है। ओडिशा में 21 में से 16 और झारखंड में 14 में से 10 सांसदों के खिलाफ मामले हैं। तमिलनाडु में 39 में से 26 सांसदों ने ऐसे मामलों की जानकारी दी है।
विशेष अदालतों की मांग
अमिकस क्यूरी ने मामलों के जल्द निपटारे के लिए सांसदों और विधायकों से जुड़े मुकदमों की सुनवाई विशेष अदालतों में प्राथमिकता के आधार पर कराने का सुझाव दिया है। साथ ही हाई कोर्ट से इन मामलों की मासिक निगरानी करने और आरोप तय होने के एक वर्ष के भीतर सुनवाई पूरी कराने की दिशा में कदम उठाने का आग्रह किया गया है।
रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब सुप्रीम कोर्ट में जनप्रतिनिधियों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों के त्वरित निपटारे को लेकर सुनवाई चल रही है।





