वाशिंगटन। आर्थिक संकट और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की शर्तों के बीच पाकिस्तान के लगातार बढ़ते रक्षा बजट पर अमेरिका ने सवाल उठाए हैं। अमेरिका ने पाकिस्तान से सैन्य और खुफिया खर्च में पारदर्शिता बढ़ाने तथा बजट पर नागरिक और संसदीय निगरानी मजबूत करने को कहा है।
पाकिस्तान ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए करीब 3 लाख करोड़ पाकिस्तानी रुपये आवंटित किए हैं। यह पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले लगभग 18 प्रतिशत अधिक है। इसके विपरीत, विकास खर्च को घटाकर करीब एक लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। पाकिस्तान सरकार ने यह बजट IMF कार्यक्रम के लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए पेश किया है।
अमेरिका की चिंता मुख्य रूप से पाकिस्तान के रक्षा और खुफिया बजट की निगरानी से जुड़ी है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार सैन्य खर्च पर पर्याप्त नागरिक एवं संसदीय निगरानी नहीं है। साथ ही पाकिस्तान के कार्यकारी बजट प्रस्ताव को सार्वजनिक करने में देरी और सरकारी कर्ज से जुड़ी सीमित जानकारी को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
पाकिस्तान लंबे समय से गंभीर आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है। देश पर कर्ज का बोझ बढ़ा है और सरकार को IMF की सहायता तथा वित्तीय सुधारों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। ऐसे में रक्षा खर्च में बढ़ोतरी और विकास बजट में कटौती ने आर्थिक प्राथमिकताओं को लेकर बहस तेज कर दी है।
नए बजट में पाकिस्तान ने आर्थिक विकास दर को चार प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। वहीं महंगाई का अनुमान 8.2 प्रतिशत रखा गया है। सरकार के सामने कर्ज भुगतान और IMF की शर्तों को पूरा करने के साथ विकास योजनाओं के लिए पर्याप्त संसाधन जुटाने की चुनौती है।
अमेरिका ने पाकिस्तान को वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत करने की दिशा में कदम उठाने का संदेश दिया है। रक्षा बजट में बढ़ोतरी के बीच वाशिंगटन की यह टिप्पणी पाकिस्तान की आर्थिक नीतियों और सैन्य खर्च को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती निगरानी को दर्शाती है।





