नई दिल्ली। राष्ट्रीय शिक्षा परिषद (एनसीईआरटी) और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) में बड़ी संख्या में पद रिक्त होने का मामला सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एनसीईआरटी में स्वीकृत पदों में करीब 57 प्रतिशत पद खाली हैं, जबकि सीबीएसई में 44 प्रतिशत पदों पर नियुक्तियां नहीं हुई हैं।
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े इन प्रमुख संस्थानों में कर्मचारियों की कमी का असर प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्यों पर पड़ सकता है। एनसीईआरटी देश में स्कूली शिक्षा के लिए पाठ्यक्रम, पाठ्यपुस्तक और शैक्षिक संसाधनों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वहीं, सीबीएसई देशभर के संबद्ध स्कूलों की बोर्ड परीक्षाओं और शैक्षणिक गतिविधियों का संचालन करता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, लंबे समय से रिक्त पदों को भरने की जरूरत महसूस की जा रही है। केंद्र सरकार की ओर से इन रिक्तियों को दूर करने के लिए भर्ती प्रक्रिया तेज किए जाने की संभावना है। आने वाले समय में विभिन्न पदों पर वैकेंसी जारी होने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों संस्थानों की जिम्मेदारियों और देशभर में उनके व्यापक कार्यक्षेत्र को देखते हुए पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध होना जरूरी है। बड़ी संख्या में पद रिक्त रहने से काम का बोझ मौजूदा कर्मचारियों पर बढ़ सकता है और निर्णय लेने तथा विभिन्न शैक्षणिक प्रक्रियाओं में देरी की आशंका रहती है।
सरकार की ओर से यदि जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाती है तो इससे संस्थानों में मानव संसाधन की कमी दूर करने के साथ-साथ उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।





