वाशिंगटन। अमेरिका की एक अपीलीय अदालत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को कथित तौर पर बच्चों और युवाओं के लिए नशे की तरह इस्तेमाल होने वाला बनाने के आरोपों से जुड़े हजारों मुकदमों को आगे बढ़ने की अनुमति दे दी है। अदालत के इस फैसले से मेटा, गूगल समेत बड़ी टेक कंपनियों को कानूनी मोर्चे पर बड़ा झटका लगा है।
नौवें अमेरिकी सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स ने मेटा और टिकटॉक की उन अपीलों को खारिज कर दिया, जिनमें इन मुकदमों को शुरुआती स्तर पर ही समाप्त करने की मांग की गई थी। करीब 3,000 से अधिक मामलों में आरोप है कि सोशल मीडिया कंपनियों ने अपने प्लेटफॉर्म को इस तरह डिजाइन किया कि युवा उपयोगकर्ता लंबे समय तक उनसे जुड़े रहें। याचिकाओं में दावा किया गया है कि ऐसे डिजाइन से बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ा।
कंपनियों ने अमेरिकी कानून की धारा 230 का हवाला देते हुए मुकदमों से राहत की मांग की थी। हालांकि, अदालत ने माना कि इस चरण पर धारा 230 के आधार पर मामलों को रोकने की मांग समय से पहले है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह प्रावधान कंपनियों के लिए पूर्ण कानूनी छूट के बजाय दायित्व से बचाव का आधार है।
मामलों में मेटा के फेसबुक और इंस्टाग्राम तथा गूगल के यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं। आरोपों में युवाओं को प्रभावित करने वाले एल्गोरिदम, लगातार कंटेंट दिखाने और अन्य ऐसी सुविधाओं का उल्लेख किया गया है, जिनसे उपयोगकर्ताओं का प्लेटफॉर्म पर समय बढ़ता है।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब मेटा को बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े अन्य मामलों में भी कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में न्यू मैक्सिको की एक अदालत ने कंपनी को बच्चों को हुए नुकसान से जुड़े मामले में 567 मिलियन डॉलर का भुगतान करने का आदेश दिया था।
अदालत के ताजा फैसले के बाद टेक कंपनियों के खिलाफ सोशल मीडिया की लत और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े मामलों की सुनवाई आगे बढ़ने की संभावना है।





