शहर गंदगी से लबालब, सफाई पर सुस्ती और वसूली अभियान में तेजी; फुटपाथ से पांच ठेले हटाए, तीन गाड़ी सामान जब्त
हल्द्वानी। “गैरो पर सितम, अपनों पर करम…” हल्द्वानी में नगर निगम की कार्रवाई को लेकर अब यही सवाल उठने लगा है। शहर का बड़ा हिस्सा गंदगी और अव्यवस्थाओं से जूझ रहा है, लेकिन नगर निगम का अमला फुटपाथ पर रोजी-रोटी कमाने वाले छोटे दुकानदारों और ठेले वालों पर कार्रवाई में मुस्तैद नजर आ रहा है। सवाल यह है कि गरीबों के ठेले और सामान तो निगम अधिकारियों को नजर आ जाते हैं, लेकिन बड़े-बड़े धन्नासेठों का अतिक्रमण आखिर क्यों दिखाई नहीं देता?
नगर निगम की ओर से रविवार को फुटपाथ पर अतिक्रमण और सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ अभियान चलाया गया। अभियान कार्यशाला रोड से मुखानी रोड, दो नहरिया होते हुए एमबी इंटर कॉलेज मैदान के पास तक चलाया गया। इस दौरान नगर निगम की टीम ने पांच ठेले और करीब तीन गाड़ी सामान जब्त किया।
नौ चालान, नौ हजार रुपये वसूले
कार्रवाई के दौरान सफाई व्यवस्था और सिंगल यूज प्लास्टिक के उल्लंघन पर नौ चालान कर 9,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया। निगम टीम ने संबंधित लोगों को नियमों का पालन करने की हिदायत भी दी।है
सफाई व्यवस्था पर सवाल, कार्रवाई सिर्फ ठेले वालों पर?
नगर निगम के इस अभियान ने शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के कई इलाकों में कूड़े के ढेर, नालियों की गंदगी और अव्यवस्थित सफाई व्यवस्था लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। ऐसे में लोगों का सवाल है कि यदि निगम का अमला रोजाना अतिक्रमण और गंदगी के खिलाफ अभियान चला रहा है तो शहर की सफाई व्यवस्था आखिर पटरी पर क्यों नहीं आ रही?
लोगों का यह भी कहना है कि फुटपाथ और सड़कों पर अतिक्रमण हटाना जरूरी है, लेकिन कार्रवाई का पैमाना एक जैसा होना चाहिए। छोटे ठेले वालों पर सख्ती और बड़े प्रतिष्ठानों के अतिक्रमण पर कथित नरमी से निगम की कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
वसूली नहीं, शहर की सफाई भी दिखे
नगर निगम के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ चालान काटना और जुर्माना वसूलना नहीं, बल्कि शहर को साफ और अतिक्रमणमुक्त बनाना है। लोगों का कहना है कि निगम की कार्रवाई का डंडा गरीब की रोजी पर ही नहीं, बल्कि रसूखदारों के अतिक्रमण पर भी बराबर चलना चाहिए। तभी अभियान को निष्पक्ष और प्रभावी माना जाएगा।





