उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल की सवारी में इस बार एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। करीब 46 साल बाद सवारी में शामिल होने वाले हाथी को बदला जा रहा है। बीमार श्यामू हाथी की जगह अब मादा हाथी सुमा बाबा महाकाल की सवारी में शामिल होगी।
महाकाल की सवारी की परंपरा में हाथी की विशेष भूमिका रही है। सवारी के दौरान हाथी की पीठ पर बाबा महाकाल का विग्रह विराजित किया जाता है और महावत के साथ पंडित भी हाथी पर सवार रहते हैं। भारी भीड़ के बीच हाथी कई किलोमीटर का सफर तय करता है, ऐसे में उसकी फिटनेस को लेकर विशेष सावधानी बरती जाती है।
श्यामू हाथी का महाकाल की सवारी से लंबे समय से जुड़ाव रहा है। हालांकि, उसके स्वास्थ्य और सवारी में शामिल होने को लेकर पिछले कुछ समय से विवाद चल रहा था। चिकित्सकों ने उसकी सेहत और चलने की क्षमता को लेकर चिंता जताई थी। बताया गया कि उसके पैरों में अंदर की ओर मुड़ने की समस्या सामने आई है, जिससे लंबे रास्ते पर चलने के दौरान हादसे की आशंका हो सकती है।
श्यामू की फिटनेस जांच को लेकर जून में भी विवाद सामने आया था। चिकित्सकों की टीम उसके स्वास्थ्य परीक्षण के लिए पहुंची थी, लेकिन महावत और परिवार ने ब्लड सैंपल देने से इनकार कर दिया था। बाद में समझाइश के बाद हाथी का मल-मूत्र जांच के लिए उपलब्ध कराया गया था।
महाकाल मंदिर की सवारी में हाथी बदलने का फैसला श्रद्धालुओं के लिए भावनात्मक भी है, क्योंकि श्यामू लंबे समय से इस धार्मिक परंपरा का हिस्सा रहा है। अब सुमा के सवारी में शामिल होने से नई व्यवस्था शुरू होगी।
मंदिर प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की प्राथमिकता सवारी के दौरान हाथी और श्रद्धालुओं दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसी को ध्यान में रखते हुए स्वस्थ और सक्षम हाथी को सवारी में शामिल किए जाने की तैयारी है।
श्यामू के स्थान पर सुमा के आने से महाकाल की सवारी में एक नए अध्याय की शुरुआत होगी, जबकि श्रद्धालु वर्षों से जुड़ी श्यामू की यादों को भी संजोए रखेंगे।





