देवास। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पूर्व सरकार्यवाह सुरेश ‘भैयाजी’ जोशी ने कहा कि भारतीय संस्कृति अपने मूल्यों और जीवन-दृष्टि के कारण पूरे विश्व में श्रेष्ठ है। भारत की प्रगति केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि देश को अपनी सांस्कृतिक विरासत और मूल जीवन मूल्यों को साथ लेकर आगे बढ़ना होगा।
देवास में आयोजित कार्यक्रम में संबोधित करते हुए भैयाजी जोशी ने भारतीय संस्कृति की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा मानव कल्याण और समाज को साथ लेकर चलने की रही है। भारतीय चिंतन में संपूर्ण विश्व को एक परिवार मानने की भावना निहित है। यही दृष्टिकोण भारत को विश्व के सामने एक अलग पहचान प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि देश की प्रगति के लिए समाज में एकता, संस्कार और अपनी सांस्कृतिक जड़ों के प्रति सम्मान आवश्यक है। भारतीय संस्कृति ने हमेशा व्यक्ति के साथ-साथ समाज और राष्ट्र के कल्याण को महत्व दिया है। ऐसे मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की जरूरत है।
भैयाजी जोशी ने कहा कि आधुनिक विकास के साथ अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखना जरूरी है। भारत यदि अपनी शक्ति और सामर्थ्य को पहचानकर आगे बढ़ता है तो वह विश्व के लिए भी सकारात्मक भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने भारतीय संस्कृति में निहित सेवा, समरसता और मानव कल्याण की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने से ही राष्ट्र मजबूत होगा। उन्होंने युवाओं से भारतीय ज्ञान, परंपराओं और संस्कृति से जुड़ने तथा देश के विकास में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।
आरएसएस नेता ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए भी मार्गदर्शन देने वाली शक्ति है। इसे समझकर और जीवन में अपनाकर देश निरंतर प्रगति की दिशा में आगे बढ़ सकता है।





