नई दिल्ली। देश में बढ़ते एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) की चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने एंटीमाइक्रोबियल दवाओं की पहचान आसान बनाने हेतु उनके लेबल पर नीली ऊर्ध्वाधर पट्टी (ब्लू स्ट्रिप) अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा है। इस संबंध में केंद्र ने ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन के लिए मसौदा अधिसूचना जारी की है।
प्रस्ताव के अनुसार सभी एंटीमाइक्रोबियल दवाओं और उनसे संबंधित उत्पादों के लेबल के बाईं ओर पूरी लंबाई में स्पष्ट नीली पट्टी अंकित करनी होगी। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं, फार्मासिस्टों और स्वास्थ्यकर्मियों को ऐसी दवाओं की तुरंत पहचान कराने के साथ इनके विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना है।
स्वास्थ्य मंत्रालय का मानना है कि बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक और अन्य एंटीमाइक्रोबियल दवाओं के बढ़ते उपयोग से दवा प्रतिरोध की समस्या गंभीर होती जा रही है। इसी को देखते हुए ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (DTAB) की सिफारिश पर यह कदम उठाया गया है। मसौदा अधिसूचना पर 30 दिनों के भीतर संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस ऐसी स्थिति है, जब बैक्टीरिया, वायरस, फंगस या अन्य सूक्ष्मजीव दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं। इसके कारण सामान्य संक्रमणों का इलाज कठिन हो जाता है और गंभीर स्वास्थ्य जोखिम बढ़ जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी इसे वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती मान चुका है।
सरकार का कहना है कि नीली पट्टी वाली लेबलिंग से एंटीमाइक्रोबियल दवाओं की अलग पहचान बनेगी और इनके अनावश्यक या गलत इस्तेमाल पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। अंतिम नियम लागू होने के बाद सभी दवा निर्माताओं को नए लेबलिंग मानकों का पालन करना होगा।





