नई दिल्ली। देश में डेंगू को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गई है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के एक अध्ययन में सामने आया है कि भारत के आठ राज्यों में डेंगू वायरस के चारों प्रमुख स्ट्रेन (सेरोटाइप) सक्रिय हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, एक ही क्षेत्र में कई स्ट्रेन का प्रसार बीमारी की गंभीरता को बढ़ा सकता है।
ICMR और उसके नेटवर्क की ओर से किए गए राष्ट्रव्यापी अध्ययन में वर्ष 2023 से 2025 के बीच डेंगू के नमूनों की जांच की गई। इस अध्ययन में 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 45 वायरस रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लैबोरेटरीज (VRDLs) से मिले 6,889 डेंगू पॉजिटिव नमूनों का विश्लेषण किया गया।
अध्ययन में पाया गया कि डेंगू वायरस के चारों सेरोटाइप—DENV-1, DENV-2, DENV-3 और DENV-4—देश के आठ राज्यों में एक साथ मौजूद हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में DENV-2 स्ट्रेन का प्रभाव सबसे अधिक देखा गया, हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों में वायरस के प्रकारों में अंतर भी सामने आया।
विशेषज्ञों का कहना है कि एक से अधिक डेंगू स्ट्रेन का एक साथ प्रसार स्वास्थ्य के लिए चुनौती पैदा कर सकता है। अध्ययन में यह भी संकेत मिला कि अलग-अलग सेरोटाइप से एक साथ संक्रमित मरीजों में प्लेटलेट्स की कमी, जोड़ों में दर्द और रक्तस्राव जैसी गंभीर स्थितियों का खतरा बढ़ सकता है।
ICMR के अध्ययन को देश में डेंगू वायरस के प्रसार और उसके बदलते स्वरूप को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शोधकर्ताओं का कहना है कि लगातार निगरानी और क्षेत्रीय स्तर पर वायरस की पहचान से भविष्य में डेंगू नियंत्रण रणनीति और वैक्सीन नीति बनाने में मदद मिलेगी।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के दौरान डेंगू फैलाने वाले एडीज मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है। ऐसे में लोगों को घरों और आसपास पानी जमा नहीं होने देने, मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाने और बुखार जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने की सलाह दी जा रही है।
केंद्र और राज्य सरकारें डेंगू की रोकथाम के लिए निगरानी, जांच सुविधाओं और जनजागरूकता अभियानों पर जोर दे रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि चारों स्ट्रेन की मौजूदगी को देखते हुए समय पर पहचान और बेहतर निगरानी व्यवस्था बेहद जरूरी है।





