नई दिल्ली। भारत ने मोबाइल फोन विनिर्माण और निर्यात के क्षेत्र में पिछले एक दशक में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। सरकार ने संसद में बताया कि वित्त वर्ष 2014-15 से 2025-26 के बीच देश का मोबाइल फोन निर्यात 165 गुना बढ़कर लगभग 1,500 करोड़ रुपये से 2.59 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह वृद्धि भारत के वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र के रूप में उभरने का संकेत मानी जा रही है।
संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना, ‘मेक इन इंडिया’ अभियान और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने वाली नीतियों का इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इन पहलों के चलते देश में मोबाइल फोन निर्माण क्षमता में तेजी से विस्तार हुआ और वैश्विक कंपनियों ने भारत को अपने प्रमुख विनिर्माण केंद्र के रूप में अपनाया।
सरकार का कहना है कि भारत अब केवल घरेलू मांग पूरी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के कई देशों को बड़े पैमाने पर मोबाइल फोन निर्यात कर रहा है। इससे विदेशी मुद्रा आय में वृद्धि के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र का निर्यात लगातार बढ़ने से भारत की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में हिस्सेदारी भी मजबूत हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र में यह तेजी भारत की औद्योगिक क्षमता और प्रतिस्पर्धात्मकता को दर्शाती है। मोबाइल फोन उत्पादन में वृद्धि के साथ अब देश में कंपोनेंट निर्माण, अनुसंधान एवं विकास तथा सहायक उद्योगों का भी विस्तार हो रहा है, जिससे संपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम को मजबूती मिल रही है।
सरकार ने विश्वास जताया है कि आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में और तेजी आएगी। इसके लिए विनिर्माण अवसंरचना को मजबूत करने, निवेश आकर्षित करने और उच्च तकनीक वाले उत्पादन को बढ़ावा देने पर लगातार काम किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स एवं मोबाइल फोन निर्माण का अग्रणी केंद्र बनाना है।





