नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं पर लगाम कसने के लिए पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 लोकसभा में पेश किया। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाना है तथा संगठित तरीके से होने वाले परीक्षा घोटालों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
लोकसभा में चर्चा के दौरान डॉ. सिंह ने कहा कि सरकार छात्रों के भविष्य से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में पेपर लीक और संगठित परीक्षा माफिया की गतिविधियों को देखते हुए मौजूदा कानून को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता महसूस हुई।
संशोधन विधेयक के तहत दोषियों के लिए सजा और आर्थिक दंड दोनों को बढ़ाने का प्रस्ताव है। प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार, पेपर लीक और अन्य गंभीर अनियमितताओं में दोषी पाए जाने पर न्यूनतम पांच वर्ष और अधिकतम दस वर्ष तक की सजा का प्रावधान होगा। वहीं अधिकतम जुर्माना 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है।
विधेयक में परीक्षा संबंधी अपराधों की जांच में तेजी लाने के लिए विशेष जांच व्यवस्था और मामलों के शीघ्र निस्तारण की दिशा में भी प्रावधान किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इससे राष्ट्रीय स्तर की सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और अभ्यर्थियों का भरोसा मजबूत होगा।
हालांकि, विपक्ष ने विधेयक पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल सजा बढ़ाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। विपक्षी सदस्यों ने परीक्षा संचालन प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने तथा जवाबदेही तय करने की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं सरकार ने कहा कि यह विधेयक परीक्षा माफिया पर प्रभावी अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
सरकार का दावा है कि संशोधित कानून लागू होने के बाद UPSC, SSC, NEET, JEE तथा अन्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और संगठित धोखाधड़ी के मामलों पर अधिक प्रभावी कार्रवाई संभव होगी। अब इस विधेयक पर संसद में आगे चर्चा और पारित होने की प्रक्रिया जारी रहेगी।





