नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय को तराई क्षेत्र में स्थानांतरित किए जाने की चर्चाओं के बीच कांग्रेस ने इसका कड़ा विरोध जताया है। नगर कांग्रेस कमेटी नैनीताल के अध्यक्ष सचिन नेगी ने कहा कि 9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड राज्य का गठन पहाड़ और यहां के लोगों की आकांक्षाओं को ध्यान में रखकर किया गया था। ऐसे में उच्च न्यायालय को पहाड़ से हटाकर तराई में ले जाने का कोई भी निर्णय राज्य निर्माण की मूल भावना के विपरीत होगा।
उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय का स्थान पहाड़ी क्षेत्र में ही रहना चाहिए, ताकि दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों के लोगों को न्याय सुलभ बना रहे। यदि प्रमुख संस्थानों को लगातार तराई में स्थानांतरित किया जाता रहा तो पहाड़ और विशेष रूप से कुमाऊँ के हिस्से में कुछ भी नहीं बचेगा।
सचिन नेगी ने सरकार से मांग की कि सबसे पहले उत्तराखंड की स्थायी राजधानी घोषित की जाए, उसके बाद ही अन्य संस्थागत निर्णयों पर विचार किया जाए। उन्होंने कहा कि पहाड़ की पहचान, अधिकार और सम्मान से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उत्तराखंड का भविष्य पहाड़ों को मजबूत करने में है उन्हें कमजोर करने में नहीं।





