नई दिल्ली/काठमांडू: भारत और नेपाल के बीच व्यापारिक संपर्क को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। कोलकाता बंदरगाह से नेपाल के विराटनगर तक पहली सीधी रेल कार्गो सेवा शुरू हो गई है। इस नई व्यवस्था से नेपाल के पूर्वी हिस्सों में माल पहुंचाने की प्रक्रिया तेज होगी और परिवहन लागत में कमी आने की उम्मीद है।
इस रेल सेवा की शुरुआत भारत-नेपाल पारगमन संधि के तहत की गई है। पहली मालगाड़ी कोलकाता से रवाना होकर नेपाल के विराटनगर क्षेत्र तक पहुंची। यह सेवा नेपाल के लिए समुद्री मार्ग से आने वाले सामानों को रेल के जरिए सीधे पहुंचाने का नया विकल्प उपलब्ध कराएगी।
नेपाल को क्या होगा फायदा
नेपाल एक भू-आबद्ध देश है और आयात के लिए लंबे समय से भारतीय बंदरगाहों पर निर्भर रहा है। कोलकाता-विराटनगर रेल कॉरिडोर शुरू होने से नेपाल के उद्योगों को कच्चा माल, मशीनरी और अन्य जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति अधिक सुगमता से हो सकेगी। इससे सड़क परिवहन पर निर्भरता कम होगी और माल ढुलाई में समय की बचत होगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, रेल मार्ग से परिवहन होने पर बंदरगाह पर कंटेनर रुकने का खर्च, अतिरिक्त परिवहन शुल्क और देरी से जुड़ी लागत में कमी आ सकती है। इससे नेपाल के पूर्वी क्षेत्र के व्यापार और उद्योगों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलने की संभावना है।
भारत के लिए भी रणनीतिक महत्व
भारत के लिए यह परियोजना पड़ोसी देश नेपाल के साथ आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने वाली पहल मानी जा रही है। कोलकाता बंदरगाह की भूमिका बढ़ेगी और पूर्वी भारत के व्यापारिक नेटवर्क को भी फायदा मिलेगा। यह रेल संपर्क क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाने की भारत की नीति के अनुरूप है।
कार्गो निगरानी के लिए डिजिटल व्यवस्था
इस सेवा में इलेक्ट्रॉनिक कार्गो ट्रैकिंग सिस्टम (ECTS) जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे माल की आवाजाही पर बेहतर निगरानी रखी जा सकेगी और सीमा पार व्यापार प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।
भारत और नेपाल के बीच यह नई रेल सेवा दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों को नई दिशा देने वाली पहल मानी जा रही है। आने वाले समय में इससे द्विपक्षीय व्यापार बढ़ने और क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग मजबूत होने की उम्मीद है।





