वॉशिंगटन। अमेरिका ने विदेशी छात्रों, सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों से जुड़े लोगों और पत्रकारों के लिए वीजा नियमों को और सख्त कर दिया है। नए नियमों के तहत भारतीय छात्रों और अन्य विदेशी विद्यार्थियों के लिए अमेरिका में रहने की अवधि अधिकतम चार साल तक सीमित की जा रही है।
अमेरिकी प्रशासन के नए प्रावधानों के अनुसार, अब एफ-1 छात्र वीजा और जे-1 एक्सचेंज विजिटर वीजा धारकों को पहले की तरह पाठ्यक्रम या कार्यक्रम की अवधि तक रहने की खुली अनुमति नहीं मिलेगी। चार साल से अधिक समय की जरूरत होने पर उन्हें अतिरिक्त मंजूरी के लिए आवेदन करना होगा।
नए नियमों का असर खासतौर पर उन भारतीय छात्रों पर पड़ सकता है जो अमेरिका में मास्टर, पीएचडी या लंबे समय वाले शोध कार्यक्रमों में दाखिला लेते हैं। प्रशासन का कहना है कि बदलावों का उद्देश्य वीजा व्यवस्था की निगरानी मजबूत करना और नियमों के दुरुपयोग को रोकना है।
इसके अलावा, विदेशी छात्रों के लिए कुछ अन्य प्रतिबंध भी लागू किए जा रहे हैं। छात्रों को शैक्षणिक कार्यक्रम बदलने या संस्थान स्थानांतरित करने के लिए अतिरिक्त अनुमति की जरूरत पड़ सकती है। पढ़ाई पूरी होने के बाद अमेरिका छोड़ने के लिए मिलने वाली समय सीमा को भी कम करने का प्रावधान किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन बदलावों से अमेरिका में पढ़ाई की योजना बना रहे विदेशी छात्रों के सामने अनिश्चितता बढ़ सकती है। वहीं अमेरिकी सरकार का तर्क है कि नए नियम राष्ट्रीय सुरक्षा और आव्रजन व्यवस्था को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने के लिए जरूरी हैं।
भारतीय छात्र अमेरिका के उच्च शिक्षा संस्थानों में बड़ी संख्या में पढ़ते हैं, इसलिए इन नए वीजा नियमों का प्रभाव भारतीय शिक्षा समुदाय में विशेष रूप से महसूस किया जा सकता है।





