नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की पुरी में गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती से मुलाकात और उनका आशीर्वाद लेने की तस्वीरें सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन और भूख हड़ताल चला रहे हैं।
पुरी में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम के दौरान धर्मेंद्र प्रधान ने शंकराचार्य से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया। इस दौरान की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुईं। समर्थकों ने इसे धार्मिक परंपरा और श्रद्धा का प्रतीक बताया, जबकि विरोधी पक्ष ने इसे मौजूदा विवादों के बीच राजनीतिक संदेश से जोड़कर देखा।
उधर, जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन में सोनम वांगचुक शिक्षा व्यवस्था में सुधार और कथित परीक्षा अनियमितताओं को लेकर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं। उनकी भूख हड़ताल लगातार जारी है और चिकित्सकों की निगरानी में उनका स्वास्थ्य देखा जा रहा है। इस बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने भी प्रशासन को निर्देश दिया है कि यदि वांगचुक की तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ती है तो चिकित्सकीय सलाह के आधार पर आवश्यक हस्तक्षेप किया जाए।
CJP ने आरोप लगाया है कि सरकार छात्रों और युवाओं की चिंताओं की अनदेखी कर रही है। संगठन ने आंदोलन को और तेज करने की घोषणा करते हुए संसद मार्च सहित कई कार्यक्रमों की रूपरेखा भी तैयार की है। आंदोलन को विभिन्न सामाजिक संगठनों और कुछ सार्वजनिक हस्तियों का समर्थन भी मिल रहा है।
धर्मेंद्र प्रधान की धार्मिक यात्रा और दूसरी ओर उनके इस्तीफे की मांग को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन ने इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक रंग दे दिया है। फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से इस्तीफे की मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, जबकि आंदोलनकारी अपनी मांगों पर कायम हैं।





