पिथौरागढ़: उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में स्थित विश्व प्रसिद्ध आदि कैलास (छोटा कैलास) और ओम पर्वत की यात्रा ने इस साल नया इतिहास रच दिया है। यात्रा के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब पवित्र चोटियों के दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या ने 50 हजार का आंकड़ा पार कर लिया है। पिथौरागढ़ जिला प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, यात्रा शुरू होने के मात्र 56 दिनों के भीतर ही कुल 50,521 श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, और यह सिलसिला अभी भी पूरी तरह सुचारु रूप से जारी है।
पिछले वर्ष का रिकॉर्ड कुछ ही दिनों में हुआ ध्वस्त
इस वर्ष की यात्रा को लेकर देश-दुनिया के श्रद्धालुओं में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिल रहा है। बीते वर्ष (2025) के पूरे यात्रा सीजन के दौरान कुल 36,600 श्रद्धालुओं ने आदि कैलास और ओम पर्वत के दीदार किए थे, जबकि इस साल यात्रा शुरू होने के महज 39वें दिन ही पिछले साल का यह रिकॉर्ड पूरी तरह टूट गया था। स्थानीय जानकारों का मानना है कि यदि मौसम इसी तरह अनुकूल बना रहा, तो इस बार कुल यात्रियों का आंकड़ा 1 लाख के आसपास पहुंचने की पूरी संभावना है।
ऐतिहासिक सफलता के तीन प्रमुख कारण
- पीएम मोदी के दौरे का प्रभाव: स्थानीय प्रशासन और पर्यटन व्यवसायियों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदि कैलास दौरे के बाद से इस पूरे क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान मिली है। पीएम मोदी की यात्रा के बाद सोशल मीडिया, व्लॉगर्स और देश भर के तीर्थयात्रियों के बीच इस पावन स्थल के प्रति आकर्षण तेजी से बढ़ा है।
- बेहतर बुनियादी ढांचा और सरल परमिट: पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी के मुताबिक, इस रिकॉर्डतोड़ सफलता के पीछे व्यास घाटी तक बेहतर सड़क संपर्क (Road Connectivity) और प्रशासन द्वारा इनर लाइन परमिट (ILP) की व्यवस्था को बेहद सरल और ऑनलाइन करना है। इससे देश के कोने-कोने से आने वाले यात्रियों को कोई परेशानी नहीं हो रही है।
- मौसम का साथ और निर्बाध मार्ग: सीमांत क्षेत्र में इस बार मौसम ने भी यात्रियों का पूरा साथ दिया है। जून के अंत तक प्री-मानसूनी बारिश का औसत सामान्य रहने की वजह से सड़कें सुरक्षित रहीं और धारचूला से गुंजी तथा जौलीकांग/नाभीडांग का मार्ग लगातार खुला रहा, जिससे बिना किसी बड़ी बाधा के यात्रा चलती रही।
कैलास मानसरोवर यात्रा की तैयारी तेज: आदि कैलास मार्ग पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए अब जिला प्रशासन और कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) आगामी कैलास मानसरोवर यात्रा की तैयारियों में भी पूरी मुस्तैदी से जुट गया है। चूंकि आदि कैलास और ओम पर्वत की यात्रा का मार्ग गुंजी तक एक ही है, इसलिए वहां सुरक्षा और ठहरने के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
समुद्र तल से लगभग 4,700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित ‘पार्वती सरोवर’ और प्रकृति द्वारा निर्मित बर्फ के पावन ‘ॐ’ स्वरूप (ओम पर्वत) के दर्शन कर लौट रहे श्रद्धालु इस यात्रा को अपने जीवन का सबसे दिव्य और अविस्मरणीय अनुभव बता रहे हैं।





