लंदन/वॉशिंगटन। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के इस्तीफे के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बयानबाज़ी तेज हो गई है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्टार्मर की नीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए नाटो (NATO) को लेकर उनके रुख को कमजोर बताया और उन पर कई गंभीर आरोप लगाए।
ट्रंप ने कहा कि स्टार्मर ने अमेरिका के साथ संबंधों और ऊर्जा नीति के मामले में “गलत फैसले” लिए, जिसका असर ब्रिटेन की स्थिति पर पड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ब्रिटेन ने ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सही रणनीति नहीं अपनाई और पर्यावरणीय नीतियों के कारण उत्तरी सागर (North Sea) के संसाधनों का उचित उपयोग नहीं किया गया।
ट्रंप ने यह भी कहा कि स्टार्मर के नेतृत्व में ब्रिटेन की नीतियां अमेरिका के हितों से मेल नहीं खातीं। उन्होंने दावा किया कि नाटो जैसे सैन्य गठबंधन में यूरोपीय देशों को और अधिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए, जबकि ब्रिटेन की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए।
गौरतलब है कि हाल के महीनों में ट्रंप और स्टार्मर के बीच नाटो की भूमिका, रक्षा खर्च और वैश्विक सुरक्षा रणनीति को लेकर मतभेद सामने आते रहे हैं। ट्रंप पहले भी नाटो को लेकर यूरोपीय देशों पर दबाव बढ़ाने और अमेरिका की भागीदारी पर पुनर्विचार करने जैसे बयान दे चुके हैं।
उधर, स्टार्मर ने अपने कार्यकाल के दौरान नाटो को “दुनिया का सबसे प्रभावी सैन्य गठबंधन” बताया था और यूरोपीय देशों से रक्षा खर्च बढ़ाने की अपील की थी। हालांकि, उनकी सरकार को लगातार आंतरिक राजनीतिक दबाव, पार्टी में असंतोष और स्थानीय चुनावों में खराब प्रदर्शन का सामना करना पड़ा।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के ताज़ा बयान से ब्रिटेन-अमेरिका संबंधों में राजनीतिक तनाव और बढ़ सकता है, खासकर ऐसे समय में जब ब्रिटेन नेतृत्व परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है।
इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाटो की भविष्य की भूमिका और पश्चिमी देशों की एकजुटता को लेकर नई बहस को जन्म दे दिया है।





