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सिंधु जल संधि के प्रभाव से पाकिस्तान में जल संकट गहराया: सिंध और बलूचिस्तान में हालात गंभीर

नई दिल्ली / इस्लामाबाद: पाकिस्तान के लगभग एक-तिहाई हिस्से में गंभीर जल संकट पैदा हो गया है, जिससे सिंध और बलूचिस्तान प्रांत सबसे अधिक प्रभावित हैं। नहरों में पानी की भारी कमी और सिंचाई व्यवस्था पर बढ़ते दबाव ने कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संकट में डाल दिया है।

रिपोर्टों के अनुसार, सिंध प्रांत में कई प्रमुख नहर प्रणालियों में पानी की आपूर्ति तय कोटे से काफी कम हो गई है। इससे खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो रही है और किसान गंभीर परेशानी का सामना कर रहे हैं। डेडु नहर जैसे क्षेत्रों में पानी की कमी 80 प्रतिशत से अधिक तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि निचले इलाकों में पानी की कमी के कारण कृषि उत्पादन पर सीधा असर पड़ रहा है। चावल जैसे प्रमुख फसली क्षेत्रों में बुवाई में देरी हो रही है, जिससे किसानों की आय और खाद्य आपूर्ति दोनों पर दबाव बढ़ रहा है।

बलूचिस्तान में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। यहां कई इलाकों में पानी की आपूर्ति निर्धारित हिस्से से कम मिल रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट भी उत्पन्न हो गया है। सिंध और बलूचिस्तान के कई जिलों में लोग पानी के लिए वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भर होने को मजबूर हैं।

इस संकट की पृष्ठभूमि में भारत द्वारा सिंधु जल संधि को आंशिक रूप से स्थगित किए जाने की चर्चा भी जारी है, जिसे क्षेत्रीय जल प्रवाह और वितरण व्यवस्था पर असर डालने वाला कदम माना जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि पाकिस्तान के भीतर जल प्रबंधन, पुरानी सिंचाई प्रणाली और वितरण की असमानता भी संकट को बढ़ा रही है।

सिंचाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार, कई नहरों में पानी की उपलब्धता तय मात्रा से कम है, जबकि कुछ क्षेत्रों में अधिक उपयोग के कारण असंतुलन की स्थिति बनी हुई है। इससे निचले इलाकों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है।

किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो आगामी सीजन में कृषि उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है, जिसका असर राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।

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