नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में आज शिक्षक संघों ने टीचिंग एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) की अनिवार्यता को लेकर बैठक की। इस बैठक में शिक्षक समुदाय ने अपने विचार साझा किए और टीईटी को अनिवार्य बनाने के सरकारी निर्णय के प्रभावों पर चर्चा की।
बैठक में शिक्षक संघों ने कहा कि कई अनुभवी और योग्य शिक्षक ऐसे हैं जिन्होंने लंबे समय से शिक्षा के क्षेत्र में काम किया है, लेकिन नए नियम के तहत उन्हें टीईटी पास करने की बाध्यता का सामना करना पड़ सकता है। इससे न केवल शिक्षकों की नौकरी प्रभावित हो सकती है, बल्कि शिक्षा के स्तर पर भी असर पड़ने की संभावना जताई गई।
संघों ने सरकार से अपील की कि टीईटी अनिवार्यता को लागू करने में लचीलापन और मार्गदर्शन प्रदान किया जाए। बैठक में सुझाव दिया गया कि अनुभवी शिक्षकों और पुराने पदधारकों को इस नियम से छूट दी जाए, ताकि उनकी सेवाओं का लाभ शिक्षा प्रणाली को मिल सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि टीईटी का उद्देश्य शिक्षकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है, लेकिन इसे लागू करने की प्रक्रिया में संवेदनशीलता और सामाजिक न्याय का ध्यान रखना जरूरी है। शिक्षक संघों ने सरकार से इस मुद्दे पर संवाद और सहयोग की अपील की है।
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि टीईटी को अनिवार्य बनाने के निर्णय से शिक्षक भर्ती प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है। संघों ने सुझाव दिया कि सहायता और प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जाएँ, ताकि शिक्षक परीक्षा में सफलता हासिल कर सकें और शिक्षा क्षेत्र में बाधा न आए।
कुल मिलाकर, दिल्ली में हुई यह बैठक टीईटी अनिवार्यता को लेकर शिक्षक समुदाय की चिंताओं और सुझावों को सामने लाने का प्रयास थी। बैठक का उद्देश्य सरकार और शिक्षकों के बीच संवाद का पुल तैयार करना बताया गया है।





