नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने पूर्वोत्तर भारत को लेकर बड़ा संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि यदि शांति और सुरक्षा की मौजूदा स्थिति बनी रहती है, तो अगले वर्ष तक पूर्वोत्तर के अधिकांश राज्यों से सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम (AFSPA) हटाया जा सकता है।
गृह मंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में पूर्वोत्तर क्षेत्र में उग्रवाद, हिंसा और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों में उल्लेखनीय कमी आई है। केंद्र सरकार द्वारा किए गए शांति समझौतों, विकास परियोजनाओं और सुरक्षा बलों के प्रयासों का सकारात्मक असर देखने को मिला है।
अमित शाह के अनुसार, अगले वर्ष तक पूर्वोत्तर के लगभग सभी राज्य AFSPA के दायरे से बाहर हो सकते हैं, हालांकि एक-दो राज्यों में सुरक्षा परिस्थितियों के आधार पर यह कानून कुछ समय तक जारी रह सकता है।
AFSPA को लंबे समय से पूर्वोत्तर के कई संवेदनशील इलाकों में लागू किया गया था, जिससे सुरक्षा बलों को विशेष अधिकार प्राप्त होते हैं। हाल के वर्षों में क्षेत्र में शांति बहाली और सामान्य स्थिति लौटने के बाद कई इलाकों से इस कानून को चरणबद्ध तरीके से हटाया जा चुका है।
गृह मंत्री के इस बयान को पूर्वोत्तर में स्थायी शांति और विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का मानना है कि यदि AFSPA में और ढील दी जाती है, तो इससे क्षेत्र में निवेश, पर्यटन और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलेगा।
सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ स्थानीय जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए आगे का फैसला लिया जाएगा। फिलहाल, अमित शाह के इस बयान ने पूर्वोत्तर राज्यों में नई उम्मीद जगा दी है।





