देहरादून/उत्तराखंड। उत्तराखंड में चल रही चारधाम यात्रा के चरम सीजन के दौरान तीर्थस्थलों पर व्यवस्थाओं और संसाधनों की कमी सामने आ रही है। बढ़ती भीड़ के कारण यात्रियों को आवास, परिवहन, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य मूलभूत सुविधाओं के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सूत्रों के अनुसार, केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धामों में प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। हालांकि, व्यवस्थाएं इस भीड़ के अनुपात में पर्याप्त नहीं हैं, जिसके चलते कई जगहों पर लंबी कतारें, ठहरने की कमी और यातायात जाम की स्थिति बन रही है।
स्थानीय प्रशासन ने स्वीकार किया है कि पीक सीजन में अचानक बढ़ी तीर्थयात्रियों की संख्या ने संसाधनों पर दबाव बढ़ा दिया है। होटल, धर्मशालाओं और अस्थायी कैंपों में जगह की कमी के कारण कई यात्रियों को खुले में या दूरस्थ क्षेत्रों में ठहरने को मजबूर होना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ऑक्सीजन की कमी और मेडिकल सुविधाओं की सीमित उपलब्धता से यात्रियों की परेशानी बढ़ रही है। कई स्थानों पर प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों में भीड़ के कारण उपचार में देरी की शिकायतें सामने आई हैं।
परिवहन व्यवस्था पर भी दबाव साफ नजर आ रहा है। सड़कों पर लगातार जाम की स्थिति बनी हुई है और हेली सेवाओं तथा शटल वाहनों पर निर्भरता बढ़ गई है।
प्रशासन का कहना है कि अतिरिक्त पुलिस बल, स्वयंसेवकों और आपदा प्रबंधन टीमों को तैनात किया गया है, ताकि स्थिति को नियंत्रित किया जा सके। साथ ही, यात्रियों से अपील की गई है कि वे यात्रा से पहले पंजीकरण और मौसम की जानकारी अवश्य लें।
विशेषज्ञों का मानना है कि तीर्थयात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए स्थायी और दीर्घकालिक योजना की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में इस तरह की अव्यवस्था से बचा जा सके।
फिलहाल प्रशासन व्यवस्था सुधारने और भीड़ नियंत्रण के लिए लगातार प्रयास कर रहा है, लेकिन यात्रा मार्गों पर चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।





