गुवाहाटी। असम सरकार ने विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पेश कर बड़ा राजनीतिक और सामाजिक संदेश दिया है। मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा लाए गए इस बिल में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े नियमों को एक समान बनाने का प्रस्ताव रखा गया है।)
विधेयक के अनुसार राज्य में बहुविवाह पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाएगा। किसी भी समुदाय के व्यक्ति को एक से अधिक विवाह की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। बिना रजिस्ट्रेशन के साथ रहने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान भी रखा गया है।
सरकार का दावा है कि यह कानून महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए लाया जा रहा है। बिल में सभी समुदायों के लिए विवाह और तलाक का अनिवार्य पंजीकरण करने का प्रावधान शामिल है। उत्तराधिकार और संपत्ति बंटवारे के मामलों में भी समान नियम लागू करने की बात कही गई है।
प्रस्तावित यूसीसी बिल के तहत अनुसूचित जनजातियों को कुछ मामलों में छूट दी गई है। सरकार का कहना है कि जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक अधिकारों को प्रभावित नहीं किया जाएगा। वहीं विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक संगठनों ने इस विधेयक पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि लिव-इन रजिस्ट्रेशन जैसे प्रावधान व्यक्तिगत स्वतंत्रता और निजता के अधिकार में हस्तक्षेप कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने कहा कि यूसीसी का उद्देश्य समाज में समानता लाना और महिलाओं को न्याय दिलाना है। उन्होंने इसे राज्य में सामाजिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम बताया। सरकार का दावा है कि कानून लागू होने से बाल विवाह, बहुविवाह और महिलाओं के शोषण जैसी समस्याओं पर अंकुश लगेगा।
विधानसभा में इस बिल पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार असम देश का दूसरा राज्य बन सकता है, जहां उत्तराखंड के बाद यूसीसी लागू होगा। इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर भी बहस तेज होने के आसार हैं।





