रूड़की (उत्तराखंड)। पर्यावरण और ग्रामीण विकास में नवाचार की एक मिसाल पेश करते हुए गांव के सरपंच और समाजसेवी स्वामी घनश्याम ने रोड़की में एक मॉडल गोशाला का उद्घाटन किया, जहाँ से बिजली उत्पादन संभव है। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में स्वच्छ ऊर्जा का प्रयोग बढ़ाना और किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर प्रदान करना है।
स्वामी घनश्याम ने बताया कि इस मॉडल गोशाला में गोबर और पशु अपशिष्ट से बायोगैस निर्माण कर उसका उपयोग बिजली उत्पादन में किया जाएगा। इससे न केवल गाँवों में बिजली की समस्या का समाधान होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह परियोजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में एक नई दिशा देगी।
गोशाला का यह मॉडल विशेष रूप से छोटे और मध्यम किसानों के लिए फायदेमंद होगा। इसके जरिए न केवल ऊर्जा उत्पन्न होगी, बल्कि गोबर से जैविक खाद भी प्राप्त की जा सकेगी, जिससे खेती में रासायनिक उर्वरकों की जरूरत कम होगी।
इस अवसर पर स्वामी घनश्याम ने ग्रामीणों को जागरूक किया कि किस तरह से आधुनिक तकनीक और परंपरागत संसाधनों का मेल कर ग्रामीण विकास को आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अगर यह मॉडल सफल हुआ, तो इसे पूरे उत्तराखंड और देश के अन्य ग्रामीण इलाकों में लागू किया जा सकता है।
स्थानीय प्रशासन और ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों ने भी इस पहल की सराहना की और कहा कि यह मॉडल ग्रामीण ऊर्जा और स्वच्छता के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकता है। उन्होंने किसानों और ग्रामीणों से इसे अपनाने की अपील की।
स्वामी घनश्याम का यह प्रयास न केवल ऊर्जा उत्पादन बल्कि ग्रामीण समुदायों में रोजगार और सतत विकास को बढ़ावा देगा। इसके साथ ही यह पहल हरित और स्वच्छ ऊर्जा के महत्व को भी उजागर करती है।
इस मॉडल गोशाला का उद्घाटन ग्रामीणों के बीच उत्साह का कारण बना, और उन्होंने कहा कि यह पहल गांव के विकास और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।





