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अदिवासियों की संस्कृति का उत्सव: आदिबद्री में नाउथा कौथिग समारोह का उद्घाटन

चमोली। चमोली के आदिबद्री गांव में शुक्रवार को नाउथा कौथिग समारोह का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम स्थानीय आदिवासी समुदाय की सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं को जीवंत रखने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। समारोह का उद्घाटन मोहन भंडारी ने किया।

इस अवसर पर स्थानीय कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य, गीत और वाद्य यंत्रों के जरिए अपनी सांस्कृतिक पहचान का प्रदर्शन किया। समारोह में भाग लेने वाले लोगों ने बताया कि नाउथा कौथिग का महत्व केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने और संस्कृति के संरक्षण का संदेश देता है।

उद्घाटन समारोह में मोहन भंडारी ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी लोक परंपराओं को सीखने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

कार्यक्रम में आदिवासी हस्तशिल्प, पारंपरिक भोजन और स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। इससे न केवल संस्कृति की झलक मिली, बल्कि पर्यटकों और आगंतुकों को स्थानीय कला और जीवनशैली का भी अनुभव हुआ।

स्थानीय अधिकारियों और समाज के बुजुर्गों ने समारोह की सफलता की सराहना की और कहा कि नाउथा कौथिग जैसे कार्यक्रम न केवल सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाते हैं, बल्कि पर्यटन को भी प्रोत्साहित करते हैं। कार्यक्रम में भाग लेने वाले लोगों ने सामाजिक सौहार्द और समुदाय की एकजुटता का भी अनुभव किया।

चमोली जिले में नाउथा कौथिग का आयोजन हर साल किया जाता है और यह आदिवासी लोक संस्कृति का प्रतीक बन गया है। स्थानीय प्रशासन ने आने वाले समय में इस तरह के कार्यक्रमों को और बड़ा करने और राज्य स्तर पर प्रस्तुत करने की योजना भी बनाई है।

समारोह का समापन पारंपरिक गीत और नृत्यों के साथ हुआ, जिसमें सभी उपस्थित लोगों ने मिलकर संस्कृति का उत्सव मनाया। इस तरह नाउथा कौथिग आदिबद्री में आदिवासी लोक संस्कृति को संरक्षित और प्रसारित करने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा।

 

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