वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका द्वारा चलाया गया सैन्य अभियान Operation Epic Fury अब समाप्त कर दिया गया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने आधिकारिक रूप से इसकी घोषणा करते हुए कहा कि अभियान के प्रमुख रणनीतिक लक्ष्य हासिल कर लिए गए हैं।
अमेरिकी प्रशासन के अनुसार यह ऑपरेशन क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने, समुद्री मार्गों की रक्षा सुनिश्चित करने और ईरान समर्थित गतिविधियों से उत्पन्न खतरों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। अभियान के दौरान अमेरिकी सेना और नौसेना ने संयुक्त रूप से निगरानी, सुरक्षा गश्त और रक्षा संबंधी कार्रवाई को अंजाम दिया।
विदेश मंत्री रुबियो ने कहा कि ऑपरेशन के तहत संभावित मिसाइल और ड्रोन खतरों को प्रभावी ढंग से निष्क्रिय किया गया तथा क्षेत्र में अमेरिकी सहयोगी देशों और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई। उन्होंने बताया कि वर्तमान स्थिति को देखते हुए सक्रिय सैन्य अभियान समाप्त किया जा रहा है, हालांकि अमेरिका क्षेत्र पर लगातार नजर बनाए रखेगा।
पिछले कुछ समय से पश्चिम एशिया में समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंता बढ़ी हुई थी। लाल सागर और खाड़ी क्षेत्र में जहाजों पर हमलों तथा बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी थी। इसी पृष्ठभूमि में अमेरिका ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए यह अभियान शुरू किया था।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि सैन्य अभियान खत्म होने के बावजूद क्षेत्र में रणनीतिक निगरानी और कूटनीतिक प्रयास जारी रहेंगे। जरूरत पड़ने पर सुरक्षा हितों की रक्षा के लिए दोबारा कार्रवाई करने से भी इनकार नहीं किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऑपरेशन की समाप्ति तत्काल तनाव कम होने का संकेत जरूर देती है, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा अभी समाप्त नहीं हुई है। पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति आने वाले समय में वैश्विक राजनीति और ऊर्जा आपूर्ति पर प्रभाव डालती रह सकती है।
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के अनुसार यह कदम सैन्य कार्रवाई से कूटनीतिक संतुलन की ओर बढ़ने का संकेत माना जा रहा है, जबकि क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।





