नई दिल्ली:
भारत चीन सीमा के पास रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण शिंकू ला टनल परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है। 15,800 फीट की ऊंचाई पर बनने वाली यह सुरंग दुनिया की सबसे ऊंची सड़क सुरंग होगी और इसके पूरा होने के बाद लद्दाख क्षेत्र में सैन्य और नागरिक दोनों तरह की आवाजाही में बड़ा बदलाव आएगा।
सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा विकसित की जा रही यह सुरंग करीब 4.1 किलोमीटर लंबी होगी और निमू-पदम-दर्चा सड़क मार्ग का अहम हिस्सा है। इसके निर्माण का उद्देश्य मनाली से लेह के बीच सालभर संपर्क बनाए रखना है, क्योंकि वर्तमान में भारी बर्फबारी के कारण यह मार्ग कई महीनों तक बंद रहता है।
शिंकू ला टनल के चालू होने से मनाली-लेह मार्ग की दूरी लगभग 60 किलोमीटर तक कम हो जाएगी और यात्रा समय में भी बड़ी कमी आएगी। इससे न सिर्फ स्थानीय लोगों और पर्यटकों को सुविधा मिलेगी बल्कि भारतीय सेना को भी रणनीतिक क्षेत्रों—कारगिल, सियाचिन और नियंत्रण रेखा के पास—तेजी से पहुंचने में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार यह परियोजना सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि चीन सीमा के पास बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में भारत लगातार प्रयास कर रहा है। ऊंचाई वाले इलाकों में ऑल-वेदर कनेक्टिविटी तैयार करना भारत की सीमा सुरक्षा रणनीति का प्रमुख हिस्सा बन चुका है।
अब तक ऊंचाई पर बनी सुरंगों में चीन की मिला टनल को सबसे ऊंचा माना जाता था, लेकिन शिंकू ला टनल उसके रिकॉर्ड को पीछे छोड़ देगी। इससे हिमालयी क्षेत्रों में आधुनिक इंजीनियरिंग क्षमता और कठिन परिस्थितियों में निर्माण की भारत की तकनीकी ताकत भी सामने आएगी।
परियोजना पूरी होने के बाद लद्दाख के दूरदराज क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों, पर्यटन और आपूर्ति व्यवस्था को भी नया बल मिलने की उम्मीद है। सरकार इसे सिर्फ एक सड़क परियोजना नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय विकास से जुड़ा दीर्घकालिक निवेश मान रही है।





