नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में जोरदार बहस हुई। अदालत ने दोनों पक्षों की लंबी दलीलें सुनने के बाद इस मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। यह पूरा मामला असम पुलिस द्वारा कांग्रेस नेता के खिलाफ दर्ज की गई एक प्राथमिकी (FIR) से जुड़ा हुआ है, जिसके बाद से राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
क्या है पूरा मामला?
यह प्राथमिकी असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा की ओर से दर्ज कराई गई थी।
- पासपोर्ट का आरोप: शिकायत के अनुसार, पवन खेड़ा पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने एक जनसभा या मीडिया के सामने यह दावा किया था कि रिनिकी भुइयां सरमा के पास कई पासपोर्ट हैं।
- मानहानि और एफआईआर: इस दावे को मुख्यमंत्री की पत्नी ने अपनी छवि खराब करने वाला और पूरी तरह से निराधार बताया था, जिसके आधार पर असम पुलिस ने खेड़ा के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया था।
सुप्रीम कोर्ट में जोरदार बहस
सुनवाई के दौरान पवन खेड़ा के वकीलों ने अदालत के सामने गिरफ्तारी के दौरान हुई घटनाओं को प्रमुखता से उठाया।
- पुलिस की भारी तैनाती: खेड़ा के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उन्हें गिरफ्तार करने के लिए असम पुलिस के लगभग 60 पुलिसकर्मी अचानक उनके आवास पर पहुंच गए थे, जो एक अप्रत्याशित और असामान्य कदम था।
कानूनी दलीलें: याचिकाकर्ता के वकीलों ने तर्क दिया कि यह मामला पूरी तरह से राजनीतिक बयानबाजी से संबंधित है और इसे आपराधिक मामले के दायरे में लाकर गिरफ्तारी की कार्रवाई करना उचित नहीं है।





