Top 5 This Week

Related Posts

ईरान की अमेरिका को दोटूक चेतावनी: कहा— ‘जब तक नौसैनिक नाकाबंदी जारी, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य खोलना असंभव’

तेहरान/वाशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्धविराम (Ceasefire) की कोशिशों के बीच एक बड़ी बाधा सामने आई है। ईरान के संसद अध्यक्ष (स्पीकर) मोहम्मद बगेर गालिबफ ने शांति वार्ता से ठीक पहले अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। गालिबफ ने स्पष्ट रूप से घोषणा की है कि यदि अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी जारी रहती है, तो सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को व्यापार के लिए फिर से खोलना पूरी तरह असंभव होगा।

‘नौसैनिक नाकाबंदी के रहते शांति वार्ता अर्थहीन’

ईरानी संसद के अध्यक्ष ने वाशिंगटन और तेहरान के बीच चल रही संभावित शांति प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे ‘एकतरफा’ करार दिया।

  • अर्थव्यवस्था को बंधक बनाने का आरोप: गालिबफ ने कहा कि अमेरिका एक तरफ युद्धविराम की बात कर रहा है और दूसरी तरफ ईरानी बंदरगाहों को घेरकर वैश्विक अर्थव्यवस्था को बंधक बनाने की कोशिश कर रहा है।
  • सीजफायर की शर्त: उन्होंने तर्क दिया कि कोई भी युद्धविराम तब तक वास्तविक या अर्थपूर्ण नहीं हो सकता, जब तक कि सभी मोर्चों पर हमले रुकने के साथ-साथ आर्थिक प्रतिबंधों और नाकाबंदी को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जाता।

सोशल मीडिया पर गालिबफ की सख्त टिप्पणी

मोहम्मद बगेर गालिबफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक आधिकारिक पोस्ट के जरिए अपनी बात रखी।

  • उल्लंघन का दावा: उन्होंने लिखा, “एक पूर्ण युद्धविराम तभी सार्थक माना जाएगा जब नौसैनिक नाकाबंदी जैसी गतिविधियों से इसका उल्लंघन न हो। सभी मोर्चों पर युद्ध को पूरी तरह रोका जाना चाहिए।”
  • होर्मुज पर अडिग रुख: उन्होंने अपनी पोस्ट में साफ किया कि नाकाबंदी के माध्यम से युद्धविराम के खुले उल्लंघन के बीच ईरान होर्मुज स्ट्रेट को खोलने का जोखिम नहीं उठा सकता।

होर्मुज जलडमरूमध्य का वैश्विक महत्व

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है, जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है।

  1. ईरान का नियंत्रण: इस जलमार्ग के उत्तरी हिस्से पर ईरान का भौगोलिक नियंत्रण है, जिसे वह अक्सर पश्चिम के साथ सौदेबाजी या दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल करता है।
  2. आर्थिक प्रभाव: यदि ईरान इस मार्ग को बंद रखता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने और वैश्विक रसद आपूर्ति ठप होने का खतरा बढ़ जाएगा।

शांति वार्ता पर अनिश्चितता के बादल

ईरान के इस सख्त रुख ने प्रस्तावित शांति वार्ता और जारी युद्धविराम समझौते को अधर में लटका दिया है।

  • अमेरिकी रुख: अमेरिका ने अब तक इस चेतावनी पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन वाशिंगटन पहले ही ईरान पर क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाता रहा है।

विशेषज्ञों की राय: कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि ईरान इस बयान के जरिए अमेरिका पर अपनी आर्थिक पाबंदियों को ढीला करने का दबाव बना रहा है ताकि वार्ता की मेज पर उसकी स्थिति मजबूत रहे।

Popular Articles