तेहरान/वॉशिंगटन: मध्य पूर्व में जारी भारी तनाव के बीच ईरान ने अपनी रणनीतिक स्थिति को एक नए ‘हथियार’ के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किए गए सैन्य अभियान के 40वें दिन, दो सप्ताह का युद्धविराम बुधवार को समाप्त हो रहा है। हालांकि इस सैन्य कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र बनने से रोकना था, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में परमाणु शक्ति से कहीं अधिक ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) ईरान के लिए एक अजेय ढाल साबित हो रहा है। इसी सामरिक जलमार्ग के दम पर ईरान अमेरिका की कठोर शर्तों के आगे झुकने को तैयार नहीं है।
परमाणु कार्यक्रम बनाम होर्मुज की घेराबंदी
दशकों से अमेरिका, इजरायल और यूरोपीय देश इस चिंता में डूबे रहे हैं कि ईरान परमाणु क्षमता हासिल कर सकता है। पश्चिमी शक्तियों का तर्क रहा है कि यदि तेहरान परमाणु संपन्न बनता है, तो सऊदी अरब, मिस्र और तुर्किये जैसी क्षेत्रीय शक्तियां भी इस दौड़ में शामिल हो जाएंगी, जिससे पूरे मध्य पूर्व का संतुलन बिगड़ सकता है।
- सैन्य अभियान का असर: 28 फरवरी को शुरू हुए सैन्य अभियान ने भले ही ईरान के परमाणु बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुँचाया हो और उसे परमाणु लक्ष्य से दूर कर दिया हो, लेकिन ईरान ने इसका जवाब वैश्विक अर्थव्यवस्था की ‘नस’ पकड़कर दिया है।
- रणनीतिक हथियार: होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल गलियारा है, जिस पर ईरान का भौगोलिक नियंत्रण उसे अमेरिका के खिलाफ सौदेबाजी की मेज पर मजबूत स्थिति प्रदान करता है।
क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज जलडमरूमध्य?
होर्मुज स्ट्रेट ईरान के लिए केवल एक जलमार्ग नहीं, बल्कि एक ऐसा वैश्विक स्विच है जिसे दबाकर वह दुनिया की अर्थव्यवस्था में भूचाल ला सकता है।
- तेल आपूर्ति की लाइफलाइन: दुनिया के कुल तेल उत्पादन का लगभग पांचवां हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है। यदि ईरान इस मार्ग को बाधित करता है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं।
- अमेरिकी दुविधा: अमेरिका और उसके सहयोगी जानते हैं कि ईरान पर अधिक दबाव डालने की स्थिति में तेहरान इस मार्ग को बंद कर सकता है, जिससे न केवल पश्चिमी देशों में ऊर्जा संकट पैदा होगा, बल्कि वैश्विक मंदी का खतरा भी बढ़ जाएगा।
युद्धविराम की समाप्ति और भविष्य की अनिश्चितता
बुधवार को युद्धविराम की अवधि समाप्त होने के साथ ही क्षेत्र में दोबारा सैन्य गतिविधियां तेज होने की आशंका है।
- शर्तों पर अड़ा ईरान: अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय हस्तक्षेप पर पूरी तरह रोक लगाए, लेकिन ईरान होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी पकड़ को देखते हुए किसी भी ऐसी शर्त को मानने से इनकार कर रहा है जो उसकी संप्रभुता को चोट पहुँचाती हो।
क्षेत्रीय शक्तियों की नजर: सऊदी अरब और मिस्र जैसे देश इस टकराव पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं। उन्हें डर है कि यदि संघर्ष बढ़ता है, तो इसकी आंच पूरे खाड़ी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगी।





