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सीजफायर के दावों के बीच फिर भड़की जंग की आग: ईरान की तेल रिफाइनरी पर हमला; तेहरान ने कुवैत पर दागे दर्जनों सुसाइड ड्रोन

तेहरान/कुवैत सिटी। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच घोषित युद्ध विराम (Ceasefire) की उम्मीदों को करारा झटका लगा है। शांति समझौते की घोषणा के कुछ ही घंटों के भीतर दोनों पक्षों की ओर से घातक हमले शुरू हो गए हैं। बुधवार सुबह ईरान के सामरिक रूप से महत्वपूर्ण लावन द्वीप (Lavan Island) स्थित तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया गया, जिसके जवाब में ईरान ने कुवैत में स्थित ऊर्जा केंद्रों पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए। इन घटनाओं ने क्षेत्र में ‘स्थायी शांति’ के दावों पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

ईरान की ऊर्जा लाइफलाइन ‘लावन द्वीप’ पर प्रहार

फारस की खाड़ी में स्थित ईरान के प्रमुख तेल निर्यात और शोधन केंद्र, लावन द्वीप पर हुए हमले ने तेहरान को हिला कर रख दिया है।

  • रिफाइनरी में आग: प्रत्यक्षदर्शियों और सैटेलाइट तस्वीरों के अनुसार, रिफाइनरी परिसर में जोरदार धमाकों के बाद भीषण आग लग गई। हालांकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह हमला मिसाइल से किया गया या लंबी दूरी के ड्रोन से।
  • आर्थिक चोट: लावन द्वीप ईरान के तेल शोधन और भंडारण के लिए रीढ़ की हड्डी माना जाता है। इस हमले से ईरान की तेल निर्यात क्षमता को गंभीर नुकसान पहुँचने की आशंका है।

जवाबी कार्रवाई: कुवैत के ऊर्जा केंद्रों पर ईरान का ड्रोन हमला

लावन द्वीप पर हुए हमले के कुछ ही समय बाद ईरान ने भी अपनी आक्रामकता दिखाते हुए पड़ोसी देश कुवैत को निशाना बनाया, जहाँ अमेरिकी सैन्य उपस्थिति और ऊर्जा केंद्र मौजूद हैं।

  • ड्रोन की बारिश: कुवैती रक्षा मंत्रालय के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, बुधवार सुबह करीब 5:00 बजे से ही ईरानी सीमा की ओर से दर्जनों सुसाइड ड्रोन ने कुवैत की हवाई सीमा का उल्लंघन किया।
  • 28 ड्रोन मार गिराए गए: कुवैत की एयर डिफेंस प्रणाली ने मुस्तैदी दिखाते हुए अब तक 28 हमलावर ड्रोनों को हवा में ही नष्ट कर दिया है। कुवैत ने इसे अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला करार देते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग की है।

क्या विफल हो गया युद्ध विराम?

यह हिंसा ऐसे समय में हुई है जब पूरी दुनिया अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14 दिनों के ‘सीजफायर’ का स्वागत कर रही थी।

  • विश्वास का संकट: विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच जमीनी स्तर पर सेनाओं और मिलिशिया समूहों के बीच संचार की कमी या जानबूझकर की गई उकसावे की कार्रवाई ने इस समझौते को खतरे में डाल दिया है।
  • होर्मुज जलमार्ग पर खतरा: इन हमलों के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव फिर से चरम पर पहुँच गया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति बहाल होने की उम्मीदों को धक्का लगा है।

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