देहरादून। उत्तराखंड में ऐतिहासिक ‘समान नागरिक संहिता’ (UCC) को लागू हुए एक वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन तकनीकी बाधाओं के कारण यह कानून अब भी थानों की फाइलों तक सीमित है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, पुलिस विभाग इस नए कानून को धरातल पर उतारने में बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा है। मुख्य समस्या राष्ट्रीय स्तर पर इस्तेमाल होने वाले डिजिटल ढांचे में है, जिसके कारण पुलिस चाहकर भी नए प्रावधानों के तहत कानूनी कार्रवाई नहीं कर पा रही है।
CCTNS पोर्टल में तकनीकी खामी बनी मुख्य बाधा
पूरे देश की पुलिस जिस ‘CCTNS’ (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स) पोर्टल का उपयोग FIR दर्ज करने और अपराधियों का डेटा रखने के लिए करती है, उसमें अब तक UCC की धाराओं को शामिल नहीं किया गया है।
- डिजिटल अपडेट का इंतजार: चूंकि CCTNS एक केंद्रीकृत (Centralized) सॉफ्टवेयर है, इसलिए जब तक नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) इसमें उत्तराखंड UCC की विशिष्ट धाराओं को फीड नहीं करता, तब तक कोई भी पुलिसकर्मी ऑनलाइन FIR में इन धाराओं का चयन नहीं कर सकता।
- मैनुअल कार्रवाई में दिक्कत: डिजिटल इंडिया के इस दौर में अधिकांश पुलिस कार्य ऑनलाइन ही होते हैं, ऐसे में सॉफ्टवेयर अपडेट के बिना नए कानून के तहत केस दर्ज करना तकनीकी रूप से असंभव बना हुआ है।
हरिद्वार की घटना से खुली व्यवस्था की पोल
हाल ही में हरिद्वार जिले में सामने आए एक मामले ने इस तकनीकी लाचारी को सार्वजनिक कर दिया है। यहाँ एक पीड़ित महिला ने ‘ट्रिपल तलाक’ और ‘हलाला’ जैसी कुरीतियों के खिलाफ UCC के कड़े प्रावधानों के तहत न्याय की गुहार लगाई थी।
- पुरानी धाराओं का सहारा: पुलिस सूत्रों का कहना है कि वे पीड़िता की शिकायत को UCC के तहत दर्ज करना चाहते थे, लेकिन पोर्टल पर विकल्प न होने के कारण उन्हें मजबूरन पुराने कानूनों और भारतीय न्याय संहिता की सामान्य धाराओं के तहत ही मामला दर्ज करना पड़ा।
- कानूनी पेच: विशेषज्ञों का मानना है कि यदि FIR नए कानून के तहत नहीं होती, तो अदालत में आरोपी को UCC में निर्धारित सख्त सजा दिलाना एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
शासन और प्रशासन की प्रतिक्रिया
उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय इस संबंध में लगातार केंद्र सरकार और तकनीकी एजेंसियों के संपर्क में है।
“हम इस तकनीकी समस्या से अवगत हैं और CCTNS पोर्टल में UCC की धाराओं को एकीकृत (Integrate) करने के लिए संबंधित विभाग को पत्र लिखा गया है। सॉफ्टवेयर अपडेट होते ही राज्य भर के थानों में नए कानून के तहत त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।” — वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, उत्तराखंड





