बुधवार को खुर्पाताल न्याय पंचायत और मंगोली क्षेत्र के ग्रामीणों ने सड़क पर उतरकर सरकार और आबकारी विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इस दौरान महिलाओं के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीणों ने मुख्य मार्ग पर चक्का जाम कर दिया, जिससे पर्यटकों और स्थानीय लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
प्रदर्शन की मुख्य बातें और घटनाक्रम इस प्रकार है:
“मधुशाला नहीं, पाठशाला चाहिए” के नारों से गूँजा क्षेत्र
- विरोध प्रदर्शन में महिलाओं की भागीदारी सबसे अधिक रही। प्रदर्शनकारियों ने “मधुशाला नहीं, पाठशाला चाहिए” और “नशा नहीं, रोजगार दो” जैसे नारों के साथ अपना विरोध दर्ज कराया।
- ग्रामीणों का तर्क है कि रिहायशी इलाकों और स्कूलों के पास शराब की दुकान खुलने से क्षेत्र का माहौल खराब होगा और युवा पीढ़ी नशे की गर्त में जाएगी।
चक्का जाम से पर्यटकों की बढ़ी मुश्किलें
- ग्रामीणों ने खुर्पाताल और मंगोली के पास मुख्य सड़क पर धरना दे दिया, जिससे वाहनों के पहिये पूरी तरह थम गए।
- पर्यटन सीजन की शुरुआत होने के कारण मार्ग पर वाहनों का भारी दबाव था। जाम की वजह से नैनीताल आने-जाने वाले सैकड़ों पर्यटक वाहन घंटों तक फंसे रहे।
- कई पर्यटकों ने विरोध प्रदर्शन को देखते हुए अपने गंतव्य स्थल तक पहुँचने के लिए वैकल्पिक मार्गों का सहारा लिया, लेकिन संकरी सड़कों पर वहाँ भी जाम की स्थिति बनी रही।
पूरी रात चला धरना, प्रशासन के हाथ-पांव फूले
- स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, खुर्पाताल में ग्रामीणों का धरना प्रदर्शन मंगलवार रात से ही शुरू हो गया था, जो बुधवार दोपहर तक जारी रहा।
- सूचना मिलने पर पुलिस और तहसील प्रशासन की टीम मौके पर पहुँची और ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की। हालांकि, ग्रामीण इस बात पर अड़े रहे कि जब तक शराब की दुकान का लाइसेंस निरस्त नहीं होता, वे पीछे नहीं हटेंगे।
ग्रामीणों की प्रमुख माँगें:
- लाइसेंस का निरस्तीकरण: प्रस्तावित शराब की दुकान का ठेका तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए।
- आवासीय क्षेत्र से दूरी: किसी भी परिस्थिति में गांव की सीमा या मुख्य सड़क के किनारे शराब की दुकान न खोली जाए।
- शिक्षा पर जोर: ग्रामीणों ने मांग की कि सरकार क्षेत्र में शराब की दुकानों के बजाय पुस्तकालय और कौशल विकास केंद्र खोलने पर ध्यान दे।





