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चीनी राजदूत का भारत पर बड़ा बयान: ‘चीन के खतरे’ की अफवाहें फैलाकर कुछ लोग उठा रहे हैं फायदा; युवा संवाद में जताई चिंता

नई दिल्ली (26 मार्च, 2026): भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग (Xu Feihong) ने गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में बड़ा और विवादास्पद बयान दिया है। चौथे चीन-भारत युवा संवाद को संबोधित करते हुए, राजदूत शू ने भारत में ‘चीन के खतरे’ (China Threat) को लेकर फैली अफवाहों और हाइप पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ “विशिष्ट ताकतें” (Certain Forces) जानबूझकर दोनों पड़ोसी देशों के बीच के मतभेदों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रही हैं। शू का मानना है कि इन ताकतों का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच अविश्वास और डर पैदा करना है, ताकि वे अपने निजी और राजनीतिक हितों के लिए इसका फायदा उठा सकें।

‘चीन के खतरे’ की हाइप: शू ने इसे बताया “प्रचार” और “साजिश”

चीनी राजदूत शू फेइहोंग ने युवाओं को संबोधित करते हुए अपने देश का पक्ष मजबूती से रखा:

  • गलत धारणाएं: उन्होंने कहा कि भारत और चीन के बीच कुछ मुद्दों पर असहमति हो सकती है, लेकिन उन्हें ‘खतरे’ के रूप में पेश करना पूरी तरह से गलत और निराधार है।
  • ताकतों का हस्तक्षेप: शू ने आरोप लगाया कि कुछ बाहरी ताकतें (जैसे अमेरिका या अन्य पश्चिमी देश) और उनके सहयोगी भारत में ‘चीन विरोधी’ एजेंडा चला रहे हैं। वे नहीं चाहते कि दुनिया के दो सबसे बड़े विकासशील देश मिल-जुलकर रहें और प्रगति करें।
  • फायदा उठाने की कोशिश: राजदूत का दावा है कि ये ताकतें ‘चीन खतरे’ की हाइप बनाकर हथियारों का व्यापार, भू-राजनीतिक लाभ और भारत को चीन के खिलाफ एक मोहरे के रूप में इस्तेमाल करना चाहती हैं।

युवाओं से अपील: निष्पक्ष और तर्कसंगत नजरिया अपनाने की जरूरत

शू फेइहोंग ने भारत और चीन के युवाओं से एक-दूसरे के प्रति सकारात्मक और वस्तुनिष्ठ दृष्टिकोण रखने का आह्वान किया:

  1. सद्भाव में रहने की इच्छा: उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि “कुछ लोग चीन और भारत को सद्भाव में रहते नहीं देखना चाहते हैं।” युवाओं को ऐसी ताकतों के बहकावे में नहीं आना चाहिए।
  2. सत्य की खोज: राजदूत ने युवाओं से अपील की कि वे चीन के बारे में निष्पक्ष और तर्कसंगत नजरिया अपनाएं और मीडिया में चल रही नकारात्मक खबरों पर आंख बंद करके भरोसा न करें।
  3. सहयोग का महत्व: शू ने जोर देकर कहा कि भारत और चीन के बीच सहयोग न केवल दोनों देशों के लिए, बल्कि पूरे एशिया और दुनिया के लिए फायदेमंद है। युवाओं को इस सहयोग को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

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