नई दिल्ली/तेहरान (26 मार्च, 2026): पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी युद्ध अपने चौथे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है और शांति की तमाम कोशिशें विफल होती दिख रही हैं। अमेरिका द्वारा पाकिस्तान के माध्यम से भेजे गए 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव को ईरान ने ‘अत्यधिक और अनुचित’ बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया है। इसके जवाब में ईरान ने अपना 5 सूत्रीय जवाबी प्रस्ताव (Counter-proposal) पेश किया है, जिसमें युद्ध के नुकसान की भरपाई (War Reparations) और अपनी संप्रभुता को लेकर कड़े तेवर दिखाए हैं। ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे किसी के दबाव में नहीं आएंगे और जंग का अंत “अपनी शर्तों और अपने समय” के अनुसार ही करेंगे।
अमेरिका का 15 सूत्रीय प्लान और डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा
वाशिंगटन ने संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार किया था, जिसे पाकिस्तान ने तेहरान तक पहुंचाया:
- अमेरिकी शर्तें: इस प्रस्ताव में ईरान से अपना परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह बंद करने, यूरेनियम का स्टॉक सौंपने, मिसाइल क्षमताओं को सीमित करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खोलने की मांग की गई थी।
- ट्रंप की चेतावनी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक सनसनीखेज दावा किया कि अमेरिकी सेना ईरान के एक विशाल बिजली उत्पादन संयंत्र (Power Plant) को “नेस्तनाबूद” करने के बेहद करीब थी। उन्होंने कहा कि “बातचीत की गुंजाइश” को देखते हुए इस हमले को फिलहाल टाल दिया गया है, लेकिन यदि ईरान ने 48 घंटे के भीतर रास्ता नहीं खोला, तो उसके ऊर्जा ढांचे को तबाह कर दिया जाएगा।
ईरान की 5 जवाबी शर्तें: “जब हम चाहेंगे, तभी रुकेगी जंग”
ईरान के विदेश मंत्रालय और सैन्य नेतृत्व ने अमेरिका को दो टूक जवाब देते हुए अपनी शर्तें रखी हैं:
- हमलों पर पूर्ण विराम: अमेरिका और इस्राइल को ईरान के खिलाफ सभी सैन्य आक्रामकताओं और राजनीतिक हत्याओं (Assassinations) को तत्काल बंद करना होगा।
- युद्ध क्षतिपूर्ति (War Reparations): युद्ध के दौरान ईरान के बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान के लिए अमेरिका और इस्राइल को भारी हर्जाना देना होगा।
- होर्मुज पर संप्रभुता: ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पूर्ण संप्रभुता की मांग की है और कहा है कि वहां से कौन गुजरेगा, इसका फैसला केवल तेहरान करेगा।
- भविष्य की गारंटी: ईरान ने मांग की है कि अमेरिका दोबारा कभी सैन्य कार्रवाई नहीं करने की लिखित और कानूनी गारंटी दे।
- क्षेत्रीय संघर्ष विराम: यह समझौता केवल ईरान तक सीमित न होकर लेबनान, गाजा और अन्य संबद्ध मोर्चों पर भी लागू होना चाहिए।
बढ़ता तनाव: कुवैत एयरपोर्ट पर हमला और तेल संकट
कूटनीतिक दांव-पेच के बीच युद्ध के मैदान में भी भीषण तबाही जारी है:
- कुवैत एयरपोर्ट पर हमला: एक ईरानी ड्रोन हमले ने कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के ईंधन टैंक को निशाना बनाया, जिससे वहां भीषण आग लग गई। हालांकि इसमें किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन इससे खाड़ी देशों में खौफ का माहौल है।
- इस्राइली एयरस्ट्राइक: इस्राइल ने पिछले 24 घंटों में तेहरान और कज़्विन जैसे शहरों में कई सरकारी ठिकानों और मिसाइल निर्माण इकाइयों पर भारी बमबारी की है।
- ऊर्जा संकट: होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की आशंका ने दुनिया भर में तेल की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है। जापान और कई अन्य देशों ने अपना आपातकालीन तेल भंडार (Strategic Reserves) खोलना शुरू कर दिया है।




