नई दिल्ली (23 मार्च, 2026): ईरान और इजराइल-अमेरिका के बीच पश्चिम एशिया में जारी भीषण और विनाशकारी युद्ध के लंबे खिंचने की आशंकाओं के बीच, भारत सरकार ने अपनी सतर्कता और तैयारियों को अभूतपूर्व स्तर पर बढ़ा दिया है। इस युद्ध का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार, आपूर्ति श्रृंखलाओं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ रहा है, जिससे भारत की आर्थिक सुरक्षा और मुद्रास्फीति दर पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (22 मार्च) को नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर कैबिनेट की सुरक्षा मामलों की समिति (CCS – Cabinet Committee on Security) की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सहित सीसीएस के सभी सदस्य और वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी मौजूद थे।
प्रधान मंत्री का निर्देश: कालाबाजारी और जमाखोरी बर्दाश्त नहीं
प्रधानमंत्री मोदी ने सीसीएस की बैठक में पश्चिम एशिया संकट के भारत पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस युद्ध के कारण देश में आवश्यक वस्तुओं की कोई कमी नहीं होनी चाहिए और न ही आम जनता को महंगाई का सामना करना चाहिए।
- कठोर कार्रवाई: प्रधानमंत्री ने संबंधित मंत्रियों और अधिकारियों को युद्ध की आड़ में आवश्यक वस्तुओं (जैसे तेल, गैस, अनाज, दवाएं) की कालाबाजारी, जमाखोरी, और मुनाफाखोरी करने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ कठोर और त्वरित कार्रवाई करने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे तत्वों को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, क्योंकि वे देश की आंतरिक सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए खतरा हैं।
- सतत निगरानी: प्रधानमंत्री ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आवश्यक वस्तुओं की कीमतों और उपलब्धता पर सतत निगरानी रखने और जमाखोरों के खिलाफ औचक छापेमारी करने का निर्देश दिया
निर्वार्ध आपूर्ति और बेहतर लॉजिस्टिक: पेट्रोलियम, गैस और खाद पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने वर्तमान परिस्थितियों में बेहतर आपूर्ति, लॉजिस्टिक और वितरण प्रणाली बनाए रखने के महत्व को रेखांकित किया:
- तेल और गैस की आपूर्ति: प्रधानमंत्री ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री को निर्देश दिया कि वे देश में कच्चा तेल, पेट्रोल, डीजल, और एलपीजी (LPG) की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएं। उन्होंने कहा कि कूटनीतिक और व्यापारिक रास्तों का उपयोग करके तेल और गैस के नए स्रोतों की तलाश की जानी चाहिए और घरेलू उत्पादन को बढ़ाया जाना चाहिए।
- ऊर्जा और खाद: प्रधानमंत्री ने ऊर्जा और रसायन व उर्वरक मंत्रियों से भी सतत नजर बनाए रखते हुए ऊर्जा (बिजली) और खाद (खाद) की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने कहा कि फसलों की बुवाई के समय किसानों को खाद की कोई कमी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि यह देश की खाद्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
- लॉजिस्टिक और वितरण: प्रधानमंत्री ने लॉजिस्टिक और वितरण प्रणाली को और अधिक कुशल और पारदर्शी बनाने के लिए नए सुधारों और कूटनीतिक पहलों के प्रस्तावों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि आवश्यक वस्तुओं को देश के हर कोने तक समय पर पहुँचाने के लिए सभी परिवहन माध्यमों (रेल, सड़क, जल) का बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाना चाहिए।





