तेहरान/वाशिंगटन (21 मार्च, 2026): पश्चिम एशिया में जारी भीषण और विनाशकारी संघर्ष के चौथे सप्ताह में, वैश्विक ऊर्जा बाजार एक अभूतपूर्व उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है। कच्चे तेल की लगातार बढ़ती कीमतों और आपूर्ति बाधित होने की गंभीर चिंताओं के बीच, अमेरिका ने ईरान पर लगे तेल प्रतिबंधों में एक महत्वपूर्ण और अस्थायी ढील देने की घोषणा की है। इस कूटनीतिक कदम का उद्देश्य वैश्विक तेल बाजार को स्थिर करना और आपूर्ति के दबाव को कम करना है। हालांकि, ईरान ने इस अमेरिकी राहत को दरकिनार करते हुए यह कहकर पूरी दुनिया को चौंका दिया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए उसके पास कोई अतिरिक्त कच्चा तेल उपलब्ध नहीं है, जो कंटेनर पर लोड हो चुका हो।
अमेरिकी छूट: वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने का प्रयास
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने एक आधिकारिक बयान में कहा है कि तेल प्रतिबंधों में यह अस्थायी छूट वैश्विक ऊर्जा बाजारों को स्थिर करने और कच्चे तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए दी जा रही है।
- छूट की शर्तें: यह छूट केवल उन जहाजों पर लागू होगी जिन पर 20 मार्च 2026 तक ईरानी कच्चा तेल लोड हो चुका है। यह छूट 19 अप्रैल 2026 तक प्रभावी रहेगी।
- अमेरिकी आयात: इस छूट के तहत, अमेरिका में ईरानी तेल आयात को भी मंजूरी दी गई है, जो तेल की वैश्विक आपूर्ति को बढ़ाने में मदद करेगी।
- अमेरिकी ट्रेजरी सचिव का बयान: अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि इस छूट का मुख्य उद्देश्य कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति में स्थिरता लाना और बाजार के दबाव को कम करना है, जो पश्चिम एशिया संकट के कारण बढ़ा हुआ है।
ईरान की दो टूक: ‘कोई अतिरिक्त तेल नहीं’, बाजार में अनिश्चितता
ईरान के पेट्रोलियम मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमेरिकी छूट के बाद एक सख्त और स्पष्ट बयान जारी किया:
“हम यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए हमारे पास कोई अतिरिक्त कच्चा तेल उपलब्ध नहीं है, जो कंटेनर पर लोड हो चुका हो। हमारे तेल का एक बड़ा हिस्सा हमारे घरेलू उपभोग और हमारे दीर्घकालिक तेल समझौतों के लिए पहले से ही आरक्षित है। अमेरिका की यह छूट केवल एक कूटनीतिक पैंतरा है, जिसका उद्देश्य वैश्विक बाजार को गुमराह करना है।”
ईरान के इस बयान ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और चिंता को बढ़ा दिया है:
- आपूर्ति की कमी: यदि ईरान के पास वास्तव में अतिरिक्त तेल नहीं है, तो अमेरिका की छूट का बाजार पर कोई सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। कच्चे तेल की कीमतें फिर से बढ़ सकती हैं, जिससे दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहराने की आशंका बढ़ जाएगी।
- कूटनीतिक गतिरोध: ईरान का यह बयान अमेरिका के साथ चल रहे कूटनीतिक गतिरोध को और बढ़ा सकता है, क्योंकि यह अमेरिका के प्रयासों को कमजोर करता है और तेल बाजार को अस्थिर रखता है।




