नई दिल्ली (20 मार्च, 2026): अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली के एक शांत वार्ड में गाजियाबाद निवासी हरीश राणा की जिंदगी और मौत के बीच एक लंबी और भावुक प्रतीक्षा चल रही है। सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक दिशा-निर्देशों के तहत भारत के पहले आधिकारिक ‘पैसिव यूथेनेशिया’ (निष्क्रिय इच्छामृत्यु) के मामले में डॉक्टरों की विशेष टीम चरणबद्ध तरीके से लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाने की प्रक्रिया पर काम कर रही है। फिलहाल हरीश राणा की स्थिति स्थिर बनी हुई है और मेडिकल बुलेटिन के अनुसार विशेषज्ञ उनकी हर हरकत पर सूक्ष्मता से नजर रख रहे हैं।
चिकित्सा और संवेदनाओं का संतुलन: धीरे-धीरे हटाया जा रहा लाइफ सपोर्ट
डॉक्टरों की टीम हरीश को एक गरिमामय विदाई देने के लिए निर्धारित मेडिकल प्रोटोकॉल का पालन कर रही है:
- पोषण नली की गई बंद: पैसिव यूथेनेशिया की प्रक्रिया के तहत कुछ दिन पहले हरीश के पेट में लगी न्यूट्रिशन (पोषण) नली को बंद कर दिया गया है।
- दवाइयों का प्रबंधन: हालांकि भोजन की आपूर्ति रोक दी गई है, लेकिन डॉक्टर अभी उनके मस्तिष्क को दी जाने वाली जरूरी दवाइयां जारी रखे हुए हैं ताकि उन्हें किसी भी प्रकार का कष्ट न हो।
- समय सीमा अनिश्चित: विशेषज्ञों का मानना है कि न्यूट्रिशन बंद करने के बाद भी शारीरिक स्थिति के आधार पर 15 दिन से लेकर एक महीने या उससे अधिक का समय लग सकता है। पैलिएटिव केयर का उद्देश्य मौत को तेज करना नहीं, बल्कि दर्द को कम कर प्राकृतिक मृत्यु का मार्ग प्रशस्त करना है।
विशेषज्ञों की टीम कर रही निगरानी: डॉ. सीमा मिश्रा संभाल रही हैं कमान
देश के इस पहले और बेहद संवेदनशील मामले के लिए एम्स ने एक उच्च स्तरीय मेडिकल बोर्ड का गठन किया है:
- टीम का नेतृत्व: एनेस्थीसिया और पैलिएटिव मेडिसिन विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. सीमा मिश्रा इस विशेष टीम की अध्यक्षता कर रही हैं।
- बहु-विषयक विशेषज्ञ: इस टीम में न्यूरो सर्जरी, ऑन्को-एनेस्थीसिया, पैलिएटिव केयर और मनोरोग विभाग के वरिष्ठ डॉक्टर शामिल हैं, जो शारीरिक और मानसिक दोनों पहलुओं की समीक्षा कर रहे हैं।
- कोर्ट को रिपोर्ट: एम्स के पूर्व निदेशक डॉ. एमसी मिश्रा के अनुसार, डॉक्टर हर कदम की रिपोर्ट कोर्ट को सौंप रहे हैं ताकि पूरी प्रक्रिया कानूनी दायरे में रहे।
अंगदान का महादान: माता-पिता के संकल्प ने पेश की मिसाल
हरीश के माता-पिता ने अत्यंत पीड़ा के क्षणों में भी एक साहसिक निर्णय लेते हुए उनके अंगों को दान करने का फैसला किया है:
- अंगों की जांच: एम्स की एक विशेष टीम वर्तमान में हरीश के शरीर की सघन जांच कर रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कौन से अंग ट्रांसप्लांट के लिए सुरक्षित हैं।
- इन अंगों पर विचार: डॉक्टरों की टीम हरीश की किडनी, हृदय, पैंक्रियास, आंतों, कॉर्निया और हार्ट वाल्व की कार्यक्षमता का आकलन कर रही है। यदि ये अंग चिकित्सा मानकों पर खरे उतरते हैं, तो उनकी मृत्यु के पश्चात इन्हें जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन देने के लिए निकाला जाएगा।
भावुक कर देने वाला माहौल: वार्ड में उम्मीद और स्वीकार्यता
एम्स के वार्ड में हरीश की मां साये की तरह उनके साथ मौजूद हैं, जबकि पिता और भाई-बहन समय-समय पर उनसे मिलने आते हैं। मशीनों के शोर के बीच यह सफर जितना चिकित्सकीय है, उतना ही भावनात्मक भी है। परिवार की आंखों में अपने बेटे को खोने की असहनीय पीड़ा है, तो उसे इस कष्टकारी अवस्था से मुक्ति मिलने की स्वीकार्यता भी।





