देहरादून (20 मार्च, 2026): उत्तराखंड की राजनीति में लंबे समय से प्रतीक्षित धामी मंत्रिमंडल का विस्तार आज, चैत्र नवरात्र के दूसरे दिन शुक्रवार को होने जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कैबिनेट में रिक्त चल रहे पांच पदों को भरने के लिए आज राजभवन (लोकभवन) में भव्य शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया है। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। इस विस्तार के साथ ही धामी सरकार अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले अपनी ‘पूरी टीम’ मैदान में उतारने जा रही है।
शपथ ग्रहण का शुभ मुहूर्त: राजभवन में हलचल तेज
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी सरकार के दूसरे कार्यकाल के चार वर्ष पूरे होने (23 मार्च) से ठीक पहले यह बड़ा कदम उठाया है:
- आज सुबह 10 बजे: राजभवन में शपथ ग्रहण समारोह का समय तय किया गया है।
- रिक्त पदों की पूर्ति: कैबिनेट में अधिकतम 12 मंत्री हो सकते हैं। वर्तमान में मुख्यमंत्री सहित केवल 7 मंत्री थे, जबकि 5 पद खाली चल रहे थे।
- प्रमुख कारण: कैबिनेट मंत्री चंदन रामदास के निधन और प्रेमचंद अग्रवाल के इस्तीफे के बाद से ही इन पदों को भरने की मांग उठ रही थी।
इन चेहरों की लग सकती है लॉटरी: क्षेत्रीय और जातीय समीकरण पर जोर
सूत्रों के अनुसार, मंत्रिमंडल विस्तार में क्षेत्रीय संतुलन (गढ़वाल और कुमाऊं) और जातीय समीकरणों को खास तरजीह दी गई है:
- भरत सिंह चौधरी (रुद्रप्रयाग): रुद्रप्रयाग जिले से अनुभवी विधायक भरत सिंह चौधरी का नाम दौड़ में सबसे आगे है।
- खजान दास (देहरादून): दलित चेहरे के रूप में राजपुर रोड विधायक खजान दास की कैबिनेट में एंट्री लगभग तय मानी जा रही है।
- मुन्ना सिंह चौहान/विनोद चमोली: देहरादून जिले से एक और कद्दावर नेता को जगह मिल सकती है।
- कुमाऊं से नए चेहरे: पिथौरागढ़, नैनीताल या बागेश्वर जिलों से भी एक-एक विधायक को मंत्री बनाया जा सकता है ताकि सीमांत क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व मिल सके।
- महिला और युवा प्रतिनिधित्व: कैबिनेट में एक महिला विधायक या युवा चेहरे को शामिल कर पार्टी एक बड़ा संदेश देने की कोशिश में है।
20 से अधिक ‘दायित्वधारियों’ की भी होगी घोषणा
कैबिनेट विस्तार के साथ-साथ संगठन के उन कार्यकर्ताओं को भी तोहफा मिलने जा रहा है जो लंबे समय से इंतजार कर रहे थे:
- लाल बत्ती का वितरण: लगभग दो दर्जन से अधिक भाजपा नेताओं को विभिन्न निगमों, परिषदों और बोर्डों में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष (राज्य मंत्री स्तर) के पद यानी ‘दायित्व’ सौंपे जाएंगे।
चुनावी मोड: इस पूरी कवायद का उद्देश्य पार्टी के भीतर असंतोष को खत्म कर पूरी ऊर्जा के साथ चुनावी मोड में आना है।




