नई दिल्ली (19 मार्च, 2026): पश्चिम एशिया में गहराते सैन्य तनाव और इजराइल-ईरान के बीच युद्ध की आहट के बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक स्तर पर शांति बहाली के लिए सक्रिय कूटनीतिक पहल शुरू कर दी है। गुरुवार को पीएम मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति, मलयेशिया के प्रधानमंत्री और ओमान के सुल्तान के साथ अलग-अलग टेलीफोनिक वार्ता की। इन चर्चाओं का मुख्य केंद्र क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता को रोकना, मानवीय सहायता सुनिश्चित करना और संवाद के जरिए तनाव कम करना रहा। भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है।
वैश्विक नेताओं से संवाद: शांति और स्थिरता पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के महत्वपूर्ण साझेदारों के साथ मौजूदा संकट के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया:
- फ्रांस (राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों): पीएम मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों ने पश्चिम एशिया में बिगड़ते सुरक्षा हालातों पर गहरी चिंता व्यक्त की। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि संघर्ष का विस्तार रोकना वैश्विक अर्थव्यवस्था और शांति के लिए अनिवार्य है।
- मलयेशिया (पीएम अनवर इब्राहिम): दक्षिण-पूर्व एशिया के इस महत्वपूर्ण देश के साथ बातचीत में प्रधानमंत्री ने गाजा और आसपास के क्षेत्रों में मानवीय संकट पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने तत्काल संघर्ष विराम (Ceasefire) की आवश्यकता और आम नागरिकों की सुरक्षा पर बल दिया।
- ओमान (सुल्तान हैथम बिन तारिक): खाड़ी क्षेत्र के रणनीतिक साझेदार ओमान के साथ हुई बातचीत में पीएम मोदी ने क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में ओमान की भूमिका की सराहना की। उन्होंने लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन (Shipping) की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी चर्चा की।
कुवैत के क्राउन प्रिंस से भी हुई बात: ईद की बधाई और भारतीय समुदाय की सुरक्षा
इससे पहले बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी ने कुवैत के क्राउन प्रिंस शेख सबाह अल-खालिद अल-हमद अल-मुबारक अल-सबाह से संपर्क साधा था:
- ईद की शुभकामनाएं: पीएम मोदी ने क्राउन प्रिंस और कुवैत की जनता को आगामी ईद-उल-फितर की अग्रिम बधाई दी और दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंधों को याद किया।
- भारतीयों की भलाई: प्रधानमंत्री ने कुवैत में रह रहे लाखों भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और कल्याण के लिए कुवैत सरकार द्वारा किए जा रहे निरंतर सहयोग के लिए विशेष धन्यवाद व्यक्त किया।
- द्विपक्षीय सहयोग: दोनों नेताओं ने व्यापार, ऊर्जा और श्रम क्षेत्र में सहयोग को और अधिक प्रगाढ़ बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
भारत की ‘शांति दूत’ की भूमिका: क्यों अहम है यह पहल?
विशेषज्ञों का मानना है कि पीएम मोदी की यह कूटनीतिक सक्रियता भारत की ‘विश्व मित्र’ की छवि को मजबूत करती है:
- ऊर्जा सुरक्षा: पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से भारत की तेल और गैस आपूर्ति पर सीधा असर पड़ सकता है, इसलिए भारत शांति का पुरजोर समर्थक है।
- रणनीतिक संतुलन: भारत के इजराइल और अरब देशों, दोनों के साथ घनिष्ठ संबंध हैं, जिससे वह एक निष्पक्ष मध्यस्थ के रूप में उभर सकता है।
- वैश्विक प्रभाव: ‘G-20’ की अध्यक्षता के बाद भारत ग्लोबल साउथ की आवाज बनकर उभरा है, जो युद्ध के बजाय कूटनीति की वकालत करता है।





