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‘बच्चों का सर्वांगीण विकास ही राष्ट्र की सर्वोच्च प्राथमिकता’: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु; पौष्टिक भोजन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बताया अनिवार्य

नई दिल्ली (18 मार्च, 2026): राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित एक गरिमामयी कार्यक्रम में बच्चों के भविष्य को लेकर राष्ट्र का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि बच्चे ही देश का भविष्य हैं और यह सुनिश्चित करना हमारा सामूहिक कर्तव्य है कि उन्हें पौष्टिक भोजन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा बिना किसी बाधा के प्राप्त हो। राष्ट्रपति ने बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को राष्ट्र निर्माण की नींव करार दिया।

अक्षय पात्र फाउंडेशन की ऐतिहासिक उपलब्धि: 5 अरब भोजन के पैकेट का वितरण

राष्ट्रपति मुर्मु राष्ट्रपति भवन के सांस्कृतिक केंद्र में अक्षय पात्र फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक विशेष कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। यह कार्यक्रम फाउंडेशन द्वारा पांच अरब (5 Billion) भोजन के पैकेट वितरित करने के ऐतिहासिक पड़ाव के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था:

  • सराहनीय प्रयास: राष्ट्रपति ने इस उपलब्धि को एक ‘महान सेवा’ बताते हुए फाउंडेशन के प्रयासों की जमकर सराहना की।
  • भविष्य की नींव: उन्होंने कहा कि समाज के वंचित वर्ग के बच्चों तक पौष्टिक भोजन पहुँचाना केवल भूख मिटाना नहीं है, बल्कि एक स्वस्थ राष्ट्र की आधारशिला रखना है।

साझा जिम्मेदारी: केवल सरकार के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता भविष्य

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने बच्चों के विकास को एक ‘साझा सामाजिक जिम्मेदारी’ बताया। उन्होंने समाज के विभिन्न वर्गों के बीच समन्वय पर जोर दिया:

  1. सामूहिक प्रयास: मुर्मु ने कहा कि जब शिक्षक, माता-पिता, सामाजिक संगठन, कॉर्पोरेट जगत और समाज के सभी वर्ग मिलकर काम करते हैं, तभी आने वाली पीढ़ी के लिए एक मजबूत नींव रखी जा सकती है।
  2. सुरक्षित वातावरण: उन्होंने यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता जताई कि प्रत्येक बच्चे को न केवल भोजन और शिक्षा मिले, बल्कि एक स्वच्छ, स्वस्थ और सुरक्षित वातावरण भी प्राप्त हो।
  3. मूलभूत तत्व: गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, उत्तम स्वास्थ्य और पोषण को उन्होंने बच्चों के सर्वांगीण विकास (Holistic Development) के लिए अनिवार्य स्तंभ बताया।

राष्ट्र निर्माण का संदेश

राष्ट्रपति ने अपने भाषण के अंत में एक सशक्त संदेश देते हुए कहा कि बच्चों के लिए एक उज्ज्वल भविष्य तैयार करना हम सभी का नैतिक दायित्व है। उन्होंने आह्वान किया कि समाज के हर वर्ग को आगे आकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी बच्चा संसाधनों के अभाव में अपने सपनों से समझौता न करे।

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