Top 5 This Week

Related Posts

पश्चिम एशिया संकट का हवाई सेवाओं पर बड़ा प्रहार: 5,500 से ज्यादा उड़ानें रद्द; राज्यसभा में नागरिक उड्डयन मंत्री ने दी जानकारी

नई दिल्ली (16 मार्च, 2026): पश्चिम एशिया में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी भीषण संघर्ष ने न केवल वैश्विक शांति को खतरे में डाला है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात की कमर भी तोड़ दी है। सोमवार को राज्यसभा में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने बताया कि पिछले 17 दिनों से जारी इस युद्ध के कारण अब तक कुल 5,522 उड़ानें रद्द की जा चुकी हैं। इनमें भारतीय एयरलाइंस की उड़ानों के साथ-साथ विदेशी एयरलाइंस की सेवाएं भी बड़े पैमाने पर प्रभावित हुई हैं।

उड़ानों पर संकट: सरकारी आंकड़ों की जुबानी

नागरिक उड्डयन मंत्री ने सदन को अवगत कराया कि हवाई क्षेत्र (Airspace) बंद होने और सुरक्षा जोखिमों के चलते विमानन कंपनियों को अपने परिचालन में भारी कटौती करनी पड़ी है:

  • भारतीय एयरलाइंस: भारत से संचालित होने वाली और भारतीय कंपनियों की कुल 4,335 उड़ानें अब तक रद्द की गई हैं।
  • विदेशी एयरलाइंस: भारत आने वाली या भारतीय हवाई क्षेत्र का उपयोग करने वाली 1,187 विदेशी उड़ानों को भी निरस्त करना पड़ा है।
  • प्रभावित गंतव्य: मुख्य रूप से दुबई, दोहा, तेल अवीव, तेहरान और अन्य खाड़ी देशों की उड़ानों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है।

युद्ध क्षेत्र में हवाई मार्ग बंद: ईंधन और समय की बर्बादी

मंत्री के. राममोहन नायडू ने बताया कि संघर्ष के कारण पश्चिम एशिया का एक बड़ा हवाई क्षेत्र ‘नो-फ्लाई ज़ोन’ में तब्दील हो गया है:

  1. रूट में बदलाव (Rerouting): इजरायल और ईरान के ऊपर से गुजरने वाले हवाई मार्गों को बंद कर दिया गया है। अब विमानों को लंबी दूरी तय करके वैकल्पिक रास्तों (जैसे अफ्रीका या मध्य एशिया के ऊपर से) से जाना पड़ रहा है।
  2. लागत में वृद्धि: लंबी दूरी के कारण विमानों के ईंधन की खपत बढ़ गई है, जिससे एयरलाइंस पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ रहा है। इसका सीधा असर हवाई टिकटों की बढ़ती कीमतों के रूप में आम यात्रियों पर पड़ रहा है।
  3. सुरक्षा सर्वोपरि: मंत्री ने स्पष्ट किया कि यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए ही एयरलाइंस को उड़ानें रद्द करने या रूट बदलने के निर्देश दिए गए हैं।

भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर चिंता

राज्यसभा में चर्चा के दौरान विपक्षी सदस्यों ने युद्ध क्षेत्र में फंसे भारतीयों की वापसी को लेकर भी सवाल उठाए। इस पर मंत्री ने कहा:

  • सरकार स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है और विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर सुरक्षित निकासी (Evacuation) की योजनाओं पर काम कर रही है।
  • भारतीय दूतावासों को हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में नागरिकों की सहायता की जा सके।

Popular Articles