टनकपुर (चम्पावत): उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध शक्तिपीठ मां पूर्णागिरि के वार्षिक मेले के दूसरे दिन श्रद्धालुओं का भारी हुजूम देखने को मिला। कड़ाके की धूप और चढ़ाई की थकान के बावजूद भक्तों के उत्साह में कोई कमी नजर नहीं आई। उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पड़ोसी देश नेपाल सहित विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने टनकपुर की वादियों को ‘जय माता दी’ के उद्घोष से गुंजायमान कर दिया। मेला प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, दूसरे दिन देर शाम तक लगभग 9 हजार भक्तों ने मुख्य मंदिर में पहुंचकर मां के दर्शन किए और आशीर्वाद प्राप्त किया।
भोर से ही लगी लंबी कतारें: श्रद्धा और सब्र का संगम
मेले के दूसरे दिन व्यवस्थाओं का हाल कुछ इस प्रकार रहा:
- ब्रह्मदेव से ठुलीगाड़ तक रौनक: टनकपुर मुख्य बाजार से लेकर मुख्य मंदिर के प्रवेश द्वार तक चप्पे-चप्पे पर श्रद्धालुओं की टोली नजर आई। तड़के 3 बजे से ही ठुलीगाड़ और भैरव मंदिर के पास लंबी लाइनें लगनी शुरू हो गई थीं।
- भंडारों की भरमार: पैदल मार्ग पर जगह-जगह स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा भंडारों का आयोजन किया गया, जहाँ भक्तों को प्रसाद, जल और अल्पाहार की सुविधा दी गई।
- नेपाली भक्तों की आमद: सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण नेपाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां के दरबार में पहुंचे, जिससे मेले का स्वरूप अंतरराष्ट्रीय नजर आया।
प्रशासनिक सतर्कता: चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बल तैनात
बढ़ती भीड़ को देखते हुए चम्पावत जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं:
- भीड़ प्रबंधन (Crowd Management): पुलिस कर्मियों को मुख्य मंदिर परिसर और संकरे रास्तों पर तैनात किया गया है ताकि किसी भी तरह की भगदड़ की स्थिति पैदा न हो।
- यातायात व्यवस्था: टनकपुर से ठुलीगाड़ तक चलने वाले वाहनों के लिए विशेष पार्किंग जोन बनाए गए हैं। भारी वाहनों को मेला क्षेत्र से बाहर ही रोका जा रहा है।
- स्वास्थ्य सुविधाएं: स्वास्थ्य विभाग द्वारा जगह-जगह अस्थाई चिकित्सा शिविर लगाए गए हैं, जहाँ चढ़ाई के दौरान अस्वस्थ होने वाले यात्रियों का तत्काल उपचार किया जा रहा है।
मेला समिति की अपील: “व्यवस्था बनाए रखने में करें सहयोग”
पूर्णागिरि मेला समिति और स्थानीय पुजारियों ने भक्तों से कुछ महत्वपूर्ण अपील की हैं:
- साफ-सफाई का ध्यान: श्रद्धालुओं से अनुरोध किया गया है कि वे पहाड़ी रास्तों और शारदा घाट पर प्लास्टिक या कूड़ा न फैलाएं।
- दर्शन के बाद निकासी: भीड़ के दबाव को कम करने के लिए दर्शन के तुरंत बाद निकास द्वार की ओर बढ़ने के निर्देश दिए गए हैं ताकि पीछे आ रहे भक्तों को असुविधा न हो।





