यरूशलम/वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वैश्विक शांति प्रस्ताव (Peace Plan) को लेकर मध्य पूर्व की राजनीति में नया उबाल आ गया है। इजरायल ने गाजा के भविष्य को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए एक बड़ा बयान दिया है। इजरायली अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि गाजा पट्टी में सुरक्षा व्यवस्था या पुनर्निर्माण के लिए उन्हें पाकिस्तान जैसे देशों के हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है। इसके साथ ही इजरायल ने क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने के लिए ईरान को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए सख्त चेतावनी जारी की है।
गाजा में बाहरी हस्तक्षेप पर इजरायल का रुख
ट्रंप के शांति प्रस्ताव में गाजा के प्रशासन के लिए कुछ मुस्लिम देशों की सेनाओं या पर्यवेक्षकों को शामिल करने की चर्चाओं के बीच इजरायल ने अपनी मंशा स्पष्ट कर दी है:
- सुरक्षा पर समझौता नहीं: इजरायली सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि गाजा की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से इजरायल की निगरानी में रहेगी और किसी भी ऐसे देश की सेना को वहां प्रवेश नहीं दिया जाएगा जिनके संबंध हमास या अन्य चरमपंथी गुटों के प्रति नरम रहे हों।
- ‘पाकिस्तान की भूमिका की जरूरत नहीं’: इजरायल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें गाजा में शांति बहाली के लिए पाकिस्तान की किसी भी प्रकार की सैन्य या प्रशासनिक सहायता की आवश्यकता नहीं है। इजरायल का मानना है कि केवल विश्वसनीय क्षेत्रीय सहयोगी ही इस प्रक्रिया का हिस्सा हो सकते हैं।
ईरान को सीधी और सख्त चेतावनी
इजरायली नेतृत्व ने इस अवसर पर ईरान को भी आड़े हाथों लिया। इजरायल ने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने अपने ‘प्रॉक्सिस’ (जैसे हिजबुल्लाह और हमास) के जरिए ट्रंप के शांति प्रयासों में बाधा डालने की कोशिश की, तो उसे इसकी भारी कीमत चुकानी होगी।
- परमाणु कार्यक्रम पर नजर: इजरायल ने दोहराया कि वह ईरान को परमाणु शक्ति बनने से रोकने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।
- क्षेत्रीय शांति में बाधा: बयान में कहा गया कि ईरान इस समय शांति की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है और नई अमेरिकी प्रशासन के तहत उसे अपनी विस्तारवादी नीतियों को छोड़ना होगा।
ट्रंप का पीस प्लान: क्या है इजरायल की उम्मीद?
इजरायल को उम्मीद है कि डोनाल्ड ट्रंप का नया कार्यकाल ‘अब्राहम समझौते’ (Abraham Accords) को और विस्तार देगा। इजरायल चाहता है कि अमेरिका गाजा से हमास के पूर्ण खात्मे और बंधकों की सुरक्षित रिहाई की शर्त पर ही किसी भी समझौते को आगे बढ़ाए। ट्रंप का यह प्लान युद्धविराम के साथ-साथ सऊदी अरब जैसे देशों के साथ इजरायल के संबंधों को सामान्य करने पर केंद्रित बताया जा रहा है।
वैश्विक कूटनीति में हलचल
इजरायल के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई बहस छेड़ दी है। जहां पाकिस्तान और कुछ अन्य मुस्लिम देशों ने पूर्व में गाजा में मानवीय सहायता और शांति सेना भेजने की इच्छा जताई थी, वहीं इजरायल के इस सख्त रवैये ने भविष्य की कूटनीतिक वार्ताओं को जटिल बना दिया है। अमेरिका की ओर से अभी इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है कि वह अपने पीस प्लान में किन देशों को शामिल करना चाहता है।
“इजरायल अपनी सुरक्षा के लिए केवल स्वयं पर और अपने सच्चे सहयोगियों पर भरोसा करता है। गाजा में किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को तब तक स्वीकार नहीं किया जाएगा जब तक वह इजरायल की सुरक्षा गारंटी के अनुरूप न हो।” — इजरायली रणनीतिक विशेषज्ञ





