ऋषिकेश/देहरादून: उत्तराखंड के संरक्षित वन क्षेत्रों और नदियों में जारी अवैध खनन के खिलाफ वन विभाग ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। प्रभागीय वनाधिकारी के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने देर रात चलाए गए एक सर्च ऑपरेशन के दौरान अवैध रेत और बजरी से लदी दो ट्रैक्टर-ट्रालियों को रंगे हाथों पकड़ा। कार्रवाई के दौरान खनन स्थल पर रेकी (निगरानी) के लिए इस्तेमाल की जा रही दो मोटरसाइकिलें भी जब्त की गई हैं। वन विभाग की इस अचानक हुई कार्रवाई से खनन माफियाओं में हड़कंप मच गया है। हालांकि, विभाग की टीम को आता देख वाहन चालक और उनके साथी घने जंगल और अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में सफल रहे, जिनकी तलाश के लिए वन विभाग ने स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर घेराबंदी शुरू कर दी है।
सटीक सूचना पर बिछाया गया जाल
वन विभाग को पिछले कुछ समय से शिकायतें मिल रही थीं कि रात के अंधेरे में प्रतिबंधित वन क्षेत्रों से सटे नदी तटीय इलाकों में अवैध रूप से रेता-बजरी का खनन किया जा रहा है:
- छापेमारी की रणनीति: विभाग ने अपनी एक टीम को सादे कपड़ों में तैनात किया था, जिसने ट्रैक्टरों के मूवमेंट की जानकारी मुख्य टीम को दी।
- घेराबंदी: जैसे ही ट्रैक्टर-ट्रालियां नदी से बाहर निकलने लगीं, वन कर्मियों ने चारों ओर से रास्ता ब्लॉक कर दिया। खुद को घिरा देख चालक वाहन छोड़कर जंगल की ओर दौड़ पड़े।
- निगरानी के लिए बाइक: जब्त की गई बाइकों का इस्तेमाल अक्सर खनन माफिया विभाग की गाड़ियों की लोकेशन ट्रैक करने और ‘इनफॉर्मर’ के तौर पर करते हैं।
कानूनी कार्रवाई और जब्ती की प्रक्रिया
जब्त किए गए सभी वाहनों को संबंधित वन प्रभाग के परिसर में खड़ा कर दिया गया है और सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है:
- वन अधिनियम के तहत मामला: वन विभाग ने भारतीय वन अधिनियम (Indian Forest Act) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
- भारी जुर्माना: जब्त ट्रैक्टरों और ट्रालियों पर लाखों रुपये का जुर्माना लगाने के साथ-साथ उनके पंजीकरण निरस्त करने की संस्तुति भी की जा सकती है।
- वाहन स्वामियों की पहचान: इंजन और चेसिस नंबर के जरिए वाहनों के मालिकों का पता लगाया जा रहा है ताकि मुख्य सरगना तक पहुँचा जा सके।
पर्यावरण पर पड़ता प्रतिकूल प्रभाव
अवैध खनन केवल राजस्व की हानि नहीं है, बल्कि यह पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी एक गंभीर खतरा है:
- भू-क्षरण का खतरा: नदियों के तल से अनियंत्रित खनन के कारण बरसात के मौसम में बाढ़ और भू-क्षरण (Soil Erosion) का खतरा बढ़ जाता है।
- वन्यजीवों का पलायन: रात के समय मशीनों और वाहनों के शोर से जंगलों में रहने वाले वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास प्रभावित होते हैं और वे आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख करने लगते हैं।
निष्कर्ष: विभाग की खुली चेतावनी
वन विभाग के अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि वन संपदा को नुकसान पहुँचाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। आगामी दिनों में संवेदनशील इलाकों में ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी के जरिए भी निगरानी बढ़ाने की योजना है। इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि विभाग अब ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रहा है।





