देहरादून: राजधानी देहरादून की सड़कों और सार्वजनिक नालों पर कुंडली मारकर बैठे अतिक्रमणकारियों के खिलाफ नगर निगम ने मंगलवार को निर्णायक कार्रवाई की। नगर आयुक्त के निर्देश पर निगम की टीम ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में नाले, नालियों और सार्वजनिक पुलियों के ऊपर किए गए अवैध निर्माणों को जेसीबी (पीला पंजा) की मदद से जमींदोज कर दिया। इस दौरान कई जगह व्यापारियों और स्थानीय निवासियों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा, लेकिन भारी पुलिस बल की मौजूदगी के चलते निगम की टीम ने पीछे हटने से इनकार कर दिया और घंटों तक ध्वस्तीकरण अभियान जारी रखा।
अभियान का मुख्य फोकस: नाले और जल निकासी
मानसून से पहले और शहर के ड्रेनेज सिस्टम को ठीक करने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की गई:
- नालों पर पक्के निर्माण: कई क्षेत्रों में लोगों ने नालों के ऊपर पक्की दीवारें और दुकानें खड़ी कर ली थीं, जिससे सफाई व्यवस्था ठप हो गई थी।
- पुलियों का अतिक्रमण: सड़कों के किनारे बनी पुलियों को पाटकर वहां रैंप या सीढ़ियां बना दी गई थीं, जिन्हें निगम ने पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।
- प्रमुख क्षेत्र: यह कार्रवाई मुख्य रूप से चकराता रोड, धर्मपुर, और राजपुर रोड के आसपास के रिहायशी व व्यावसायिक इलाकों में की गई।
मौके पर हंगामा और तीखी नोकझोंक
जैसे ही नगर निगम का दस्ता जेसीबी लेकर मौके पर पहुंचा, व्यापारियों में हड़कंप मच गया:
- व्यापारियों का विरोध: दुकानदारों का तर्क था कि उन्हें बिना किसी पूर्व नोटिस के हटाया जा रहा है, जबकि निगम अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक मुनादी के जरिए पहले ही चेतावनी दी जा चुकी थी।
- पुलिस की मुस्तैदी: विरोध बढ़ता देख मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा। पुलिस ने नारेबाजी कर रहे लोगों को खदेड़ा और अभियान को सुरक्षा प्रदान की।
- समान जब्त: सड़क किनारे रखे गए अवैध काउंटरों, टीन शेड और विज्ञापनों के बोर्डों को भी निगम ने अपनी गाड़ियों में भरकर जब्त कर लिया।
नगर आयुक्त की कड़ी चेतावनी
नगर निगम के अधिकारियों ने साफ किया है कि यह अभियान केवल एक दिन के लिए नहीं है:
- जुर्माने की कार्रवाई: अतिक्रमण हटाने के साथ-साथ निगम ने उल्लंघन करने वालों पर भारी चालान भी किए हैं।
- पुनः अतिक्रमण पर जेल: अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि किसी ने हटाए गए स्थान पर दोबारा कब्जा करने की कोशिश की, तो उसके खिलाफ सख्त धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
- नक्शा पास कराने की अपील: लोगों से कहा गया है कि वे नालियों को खुला छोड़ें और सार्वजनिक भूमि का उपयोग निजी स्वार्थ के लिए न करें।
निष्कर्ष: शहर की सुंदरता और सुरक्षा के लिए जरूरी
स्थानीय नागरिकों के एक वर्ग ने इस कार्रवाई का स्वागत किया है। उनका मानना है कि अतिक्रमण के कारण न केवल ट्रैफिक जाम लगता है, बल्कि बारिश के मौसम में नालियां चोक होने से सड़कें तालाब बन जाती हैं। नगर निगम का यह ‘पीला पंजा’ अब देहरादून के अन्य हिस्सों में भी गर्जने को तैयार है।





